ALERT ! दिल्ली के लोगों के लिए जरूरी खबर, कर लें यह काम वरना कटेगा बिजली-पानी का कनेक्शन

नई दिल्ली [वीके शुक्ला]। राजधानी दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा का प्रमाण पत्र न लेने पर बिजली-पानी के लिए परेशानी बढ़ सकती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सभी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि जो लोग इमारत के भूकंप से सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र न लें उनका बिजली-पानी का कनेक्शन काट दें। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही कार्रवाई के बीच स्थानीय निकायों ने बहुमंजिला इमारतों को यह प्रमाण पत्र लेने के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक दो हजार से ज्यादा इमारतों को प्रमाण पत्र लेने के लिए नोटिस जारी हो चुका है। सभी को समयबद्ध तरीके से इमारतों को भूकंपरोधी होने की जांच करानी होगी। साथ ही इसका सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र निगम के पास जमा कराना होगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 से पहले बनीं इमारतों को भूकंपरोधी प्रमाण पत्र लेने के निर्देश दिए गए थे, वहीं अब 2002 के बाद बनीं इमारतों की जांच होगी। जांच के बाद उन इमारतों को भूकंपरोधी होने का प्रमाण पत्र लेना होगा। इसके लिए सभी स्थानीय निकायों ने इंजीनियर की सूची अपनी-अपनी वेबसाइट पर जारी कर रखी है। इन इंजीनियरों के माध्यम से यह प्रमाण पत्र लिया जा सकता है। ऐसे में इंजीनियर की सलाह पर उन इमारतों को भूकंपरोधी होने का प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जो जांच में खरी पाई जाएंगी। अगर इंजीनियर ऐसी इमारतों को असुरक्षित करार देते हैं तो निगम इन इमारतों को गिराने का नोटिस देगा। वहीं, मरम्मत के जरिये इन्हें ठीक किया जा सकता है तो इसे ठीक भी किया जा सकेगा।

स्थानीय निकायों की इमारतों की जांच की यह है स्थिति

  • नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने 1243 इमारतों की पहचान करके 1081 निजी इमारतों के मालिक को नोटिस जारी किए हैं। अब तक एनडीएमसी को इनमें से किसी का जवाब नहीं मिला है।
  • पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने 183 इमारतों की सुरक्षा की जांच की। इसमें 28 इमारतें सुरक्षित पाई गई हैं। अभी बाकी की जांच की प्रक्रिया चल रही है।
  • दक्षिणी निगम ने 452 इमारतों के मालिक को नोटिस भेजा है, वहीं 425 इमारतों को इंजीनियर की सलाह पर दुरुस्त किया जाना है। जिनको नोटिस भेजे गए हैं उनमें से 93 के जवाब मिल गए हैं। चार इमारतों को असुरक्षित पाए जाने पर गिरा दिया गया है।
  • 2156 इमारतों की पहचान उत्तरी निगम ने की है। इसमें से 650 निजी इमारतों के मालिकों को नोटिस भेजा है। 66 की जांच पूरी हो चुकी है। 16 इमारतों को गिरा दिया गया है।

यहां पर बता दें कि दिल्ली में बनी 75 फीसद से अधिक इमारतें भूकंपरोधी नहीं हैं। ऐसे में अगर 7 से अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो बड़ा जानमाल का नुकसान होगा। पिछले साल दिल्ली में 2 दर्जन से अधिक भूकंप आए थे, जिसने राज्य सरकार के साथ स्थानीय निकायों की भी चिंता बढ़ा दी है।

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