हैप्पी बर्थडे ख़ेसारी लाल यादव: दिल्ली की सड़कों पे लिट्टी चोखा बेचने वाले से भोजपुरी सुपरस्टार बनने तक, जानिए ख़ेसारी लाल यादव की कहानी

नई दिल्ली। जिंदगी में संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर सच्चा है तो कामयाबी जरूर मिलती है। अपनी हिम्मत और सच्ची मेहनत से कामयाबी की कहानी लिखने वाले भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार खेसारी लाल यादव को आज कौन नहीं जानता है। यूपी-बिहार ही नहीं, विदेशी में भी उनके चाहने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में हैं। कभी पाई-पाई को मोहताज खेसारी लाल यादव आज एक फिल्म के लिए 50 लाख रुपये तक की भारी-भरकम फीस लेते हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सटे बिहार के सिवान में 6 मार्च को जन्में खेसारी लाल यादव को सोशल मीडिया पर हैप्पी बर्थडे कह रहे हैं। सिर्फ देश से ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे प्रशंसक भी खेसारी लाल यादव की लंबी उम्र की कामना कर ‘Happy Birthday Khesari Lal Yadav’ लिख रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लोग उन्हें जमकर जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं।

छपरा में बेचते थे दूध, फिर दिल्ली में खोली लिट्टी चोखे की दुकान 

आज के भोजपुरी सुपर स्टार खेसारी लाल यादव की कामयाबी का सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है। तकरीबन एक दशक पहले खेसारी लाल यादव अपने गृह राज्य बिहार के छपरा जिले में दूध बेचने का काम करते थे। शरीर से ठीकठाक खेसारी ने आवेदन किया तो उनका चयन बीएसएफ में हाे गया। यहां भी एक दिक्कत थी कि उनके मन में एक गायक था और उनके दिल में भाेजपुरी गायक बनने का जुनून सवार था। बीएसएफ में शामिल हुए, ज्वाइन भी किया, लेकिन कुछ ही महीने में नौकरी छाेड़ दी। इसके बाद संघर्ष की कड़ी में दिल्ली आ गए। यहां पर आकर उन्होंने म्यूजिक एल्बम निकालने के लिए कई नामी कंपनियाें के चक्कर लगाए। बात नहीं बनी। यहां रहने के दौरान दो वक्त को रोटी का जुगाड़ करना था, इसलिए दक्षिणी दिल्ली के ओखला इलाके में लिट्टी-चाेखा की दुकान लगा ली। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हुए तो तमन्ना जाग गई म्यूजिक एल्बम निकालने की। लिट्टी-चोखा की दुकान में अपने ग्राहकों को स्वादिष्ट खाना खिलाने के दौरान  अपने ग्राहकाें काे गाना भी गाकर सुनाते थे।

बरात में डांसर बनकर कमाए हैं पैसे

बेहद साधारण परिवार से आने वाले खेसारी लाल यादव ने गरीबी को बेहद नजदीक से देखा था। यही वजह है कि वह आज भी संषर्ष की कद्र करते हैं। बिहार के सिवान के रहने वाले पिता मंगरू लाल यादव चने बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। सात भाइयों में शुमार खेसारी लाल यादव ने बहुत संघर्ष किया है। वह खुद बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए खेसारी लाल बरात में महिला डांसर बनकर भी जाते थे। उन्हाेंने अपने प्रारंभिक दाैर के एल्बम में खुद ही महिला कलाकार का राेल भी निभाया है। बिहार-पूर्वांचल में इसे लौंडा नाच के नाम भी जाना जाता है।

काययाबी की बुलंदी पर हैं खेसारी लाल यादव

खेसारी लाल यादव ने अपनी गायकी और अभिनय के दम पर रवि किशन, दिनेश लाल यादव ‘निरहुवा’, यश मिश्रा जैसे दिग्गज भोजपुरी एक्टर के समकक्ष खड़े हैं। अपने करियर की शुरुआत खेसारी लाल यादव ने भोजपुरी फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ से की थी। इस फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 11 हजार रुपये मिले थे। यह महज इत्तेफाक है कि सलमान खान को भी अपनी पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के करीब-करीब इतने ही रुपये मिले थे। अपनी मेहनत से भोजपुरी सिनेमा में खेसारी ने अपनी अलग जगह बनाई है। वर्तमान में वह भोजपुरी फिल्मों से सुपरस्टार हैं। खेसारी आज एक फिल्म के लिए कम से कम 40 से 50 लाख रुपये लेते हैं। इसी के साथ एक स्टेज शो के लिए वो 15 लाख रुपये तक लेते हैं। वह सलमान खान के शो ‘बिग बॉस 13’ में नजर भी आए थे। यह अलग बात है कि वह जल्द ही बाहर हो गए थे।

जानिये- खेसारी लाल यादव के बारे में अहम बातें

खेसारी लाल यादव खुद बताते हैं कि दिल्ली के ओखला इलाके में लिट्टी-चोखा की दुकान से जो पैसे जुटाए उससे उन्होंने म्यूजिक एल्बम निकाला। इस लिहाज से खेसारी काे पहली सफलता भाेजपुरी एल्बम ‘माल भेटाई मेला से’ मिली। इससे बाद ‘संईया अरब गईले’ गाने ने उन्हें भाेजपुरी गायकी में पहचान दिला दी। 2011 में रिलीज हुई भाेजपुरी फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ ने खेसारी लाल यादव को राताे-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्हाेंने कभी पीछे मूड़कर नहीं देखा। इसी अप्रैल में उनकी फिल्म ‘लिट्टी-चोखा’ रिलीज हो रही है, जिसमें उनके साथ काजल राघवानी भी हैं।

बेटी काे मानते हैं लकी

खेसारी लाल यादव अपनी बेटी कीर्ति को बेहद लकी मानते हैं। खेसारी का कहना है कि बेटी कीर्ति के जन्म के बाद ही उनकी एल्बम जबरदस्त हिट हुई। परिवार में पत्नी चंदा देवी के अलावा बेटे रिषभ लाल यादव भी हैं।

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