हेलमेट मैन ने कहा सरस्वती पूजा एक शिक्षा की आस्था है इसे मनोरंजन का साधन नहीं बनाएं.
प्राचीन समय से ही भारत विश्व का केंद्र रहा है शिक्षा का प्रकाश देने में. अपने देश में मिट्टी के सुगंध में भी शिक्षा का प्रकाश हुआ करती थी जो सात समंदर पार के भी लोग भारत में आकर शिक्षा लेने के बाद यहां की मिट्टी को ले जाना नहीं भूलते थे. जहां पहुंचने के लिए कोई रोड और साधन नहीं हुआ करता था लेकिन शिक्षा के लल्लायत विद्वान अपने आप को रोक नहीं पाते थे. हजारों मिल पैदल चलकर भारत की धरती पर शिक्षा लेकर अपने आप को भाग्यशाली मानते थे. तक्षशिला और नालंदा आज भी खंडहर हम सभी के बीच उदाहरण हैं. पिछले 7 सालों से हेलमेट मैन भारत की 100 प्रतिशत साक्षरता बढ़ाने के लिए 6 लाख छात्रों को पुस्तक दे चुके हैं यह पुस्तक लोगों द्वारा दान में दी गई रहती है, जो कई शहरों में बुक बैंक बॉक्स लगे हैं जिसमें लोग किताबें डालते रहते हैं.

अपने अभियान के तहत जो लाइब्रेरी बंद हो चुकी थी पुस्तकों के अभाव में आज वह फिर से चालू हो गई है. हेलमेट मैन राघवेंद्र का प्रयास है जिस गली में सरस्वती पूजा होगी अब वहां लाइब्रेरी भी होगी. भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए पढ़ने वाले छात्रों को निशुल्क किताबें देकर अपने अभियान का हिस्सा बना रहे हैं. और जो इन्हें पुरानी पुस्तक देता है उन्हें बदले में उनकी सुरक्षा के लिए हेलमेट देते हैं अब तक अपने खर्चे से 48000 लोगों को निशुल्क हेलमेट दे चुके हैं.
इसलिए आज इन्हें पूरा भारत हेलमेट मैन के नाम से जानता है. इसलिए भारत में पढ़े-लिखे नागरिकों का कर्तव्य बनता है कि भारत को फिर से महान बनाने के लिए हम सभी को साक्षरता बढ़ाने के लिए अपना योगदान देना चाहिए. बिगड़ते और बदलते हालात को सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए जो हम सभी की एक छोटी प्रयास बहुत बड़ी बदलाव में बदल सकती है. इसलिए सरस्वती पूजा की तरह विद्या सिर्फ एक दिन के लिए नहीं है जब तक हमारा समाज 100 फीसदी साक्षर न बने तब तक हमें अपना प्रयास जारी रखना चाहिए.
