रेडियो : रेडियो के जनक कौन थे, एक ऐसा सूचना यंत्र जो बना आम से ख़ास तक कि पसंद

रेडियो श्रव्य माध्यम का एक ऐसा साधन जिसने एक वक़्त पर सबको अपना दीवाना बना दिया था । शहर से लेकर दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों में रेडियो की ही हुकूमत चलती थी । समाचार हो या कृषि संबंधी;सभी अपने रुचि के कार्यक्रम को बड़े आनंद के साथ सुना करते थें ।

रेडियो द्वारा प्राप्त ये आनंद यू हीं नहीं मिला इसका भी अपना एक सफर रहा है़ । इस सफर की शुरुआत होती है़ सन 1865 में ब्रिटेन से, जेम्स कॉक मैक्सवेल नामक के एक स्कॉटिक वैज्ञानिक नें ऊर्जा के बारे में अपना एक गणितीय सिध्दान्त सबके सामने प्रस्तुत किया। इसका नाम उन्होंने विद्युत चुंबकीय तरंग दिया । उनका यह सिध्दान्त इस तथ्य पर आधारित था कि ऊर्जा हवा में प्रवाहित की जा सकती है़ । बेशक वो दिखाई ना पड़े, परंतु मैक्सवेल अपने इस सिध्दान्त को प्रमाणित ना कर सके।

इस सिध्दान्त को प्रयोग कर सफल कर दिखाया गूलेलियो मार्कोनी ने, उनका जन्म 1874 में इटली के बोलीन शहर में हुआ था । मार्कोनी बचपन से नटखट और प्रतिभावान थे । इनका मन स्कूली पाठों में तनिक भी नहीं लगता था बल्कि वो दूसरे वैज्ञानिको के सिध्दांतों को आधार बना कर नित नये -नये प्रयोगो में व्यस्त रहते थें । उनके पिता गिऊसेप मार्कोनी को उनकी ये आदते तनिक भी न भांति थी।

पिता के शिकायत के बाद भी मार्कोनी अपने प्रयासो में जुड़े रहें और सफल – असफल कोशिश के बाद उन्होंने वो करिश्मा कर दिखाया जो उस समय सिर्फ एक कल्पना थी ।

ये 1893 का समय था जब मार्कोनी मात्र 20 वर्ष के थे, तब उन्होंने पहली बार बिना तार के विद्युत चुंबकीय तरंगो को तीन किलोमीटर की दूरी तक भेजने में सफलता प्राप्त की । ये प्रयोग उन्होंने किसी बड़ी प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि अपने ही घर पर अपने चचेरे भाईयो और बहनों के साथ मिलकर किया । मार्कोनी ने खेल खेल में ही घर से तीन किलोमीटर तक तक विद्युत तरंगो को भेजने में सफलता प्राप्त की । ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, उनके इस प्रयोग ने इस बात को साबित कर दिया की विश्व में कहीं भी एक लंबी दूरी तक बेतार के संचार माध्यम कर सकते हैँ ।

सन 1896 में मार्कोनी के आविष्कार को पेटेंट की मान्यता मिल गई । सन 1897 में मार्कोनी ने वायरलेस टेलीग्राफ और सिग्नल की स्थापना की । सन 1898 में इंग्लैंड के चेम्सफोर्ड में संसार की पहली रेडियो फैक्ट्री खोली, फिर साल 1900 में ट्यून टेलीग्राफ के लिए प्रसिध्द 777 पेटेंट नंबर उन्होंने लिया । उन्होंने इस उपकरण का प्रयोग पहला वायरलेस संकेत कनाडा और इंग्लैंड के बीच अटलांटिक महासागर के पार 3020 किलोमीटर की दूरी भेजने में किया । इस प्रकार उन्होंने अपने पहले प्रयोग से 100 गुना अधिक दूरी तय कर यह साबित कर दिया की रेडियो तरंगो पर पृथ्वी की वक्र आकृति का प्रभाव नहीं पड़ता । ये प्रयोग एक मिल का पत्थर साबित हुआ । मार्कोनी के इस खोज के लिए सन 1909 में उन्हें और फरडेन्ड ब्रायन को संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार मिला । रेडियो के अविष्कार ने संपूर्ण विश्व को एक मेल मिलाप के रिश्ते में बांध दिया। जो इतना लंबा सफर तय कर यहाँ तक पहुंचा है़ ।

शेषकान्त दुबे
काशी हिन्दू विश्विद्यालय

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