नोएडा: अद्भुत पराक्रमी थे महाराजा सुहेलदेव – विनायकराव देशपांडे

नोएडा। 13 फरवरी 2021! प्रेरणा मीडिया एवं प्रेरणा शोध संस्थान न्यास द्वारा आयोजित राजा सुहेलदेव का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान विषय पर हुए वेबिनार में श्रीमान विनायकराव देशपांडे जी (संगठन महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद) और श्रीमान परमेश्वर सिंह जी (मा. विभाग संघचालक, अवध प्रांत) उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता विनायकराव देशपांडे ने राजा सुहेलदेव का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति और समाज को प्रेरणा उसके इतिहास और उसके महापुरुषों से मिलती है। अंग्रेजों ने कभी भी भारतीय महापुरुषों के इतिहास को अपने शासनकाल के दौरान भारतीय समाज के सामने नहीं रखा। इसी कारण अंग्रेजों के 1400 वर्षों के शासनकाल के दौरान हमारे भारतीय वीर महापुरुषों की वीर गाथा की जानकारी वर्तमान पीढ़ी को बहुत कम हो पायी। अंग्रेजों ने हमेशा यही बताया कि हिंदुस्तानियों को मोहम्मद तुगलक, बाबर, हुमायूं और अंत में अंग्रेजों ने हराया अर्थात् हिंदुस्तानियों को सभी विदेशी आक्रांताओं ने पराजित कर दिया। हिंदुस्तानी कौम पराजित होने वाली कौम है ऐसा उन्होंने हमारे दिमाग में डालने की कोशिश की। अंग्रेजों ने षडयंत्र पूर्वक यह चाल चली ताकि हिंदुस्तानी समाज का स्वाभिमान जागृत ना हो पाए और वह यहां पर शासन करते रहंे। अंग्रेजों ने अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए हिंदुस्तान का गलत इतिहास हमारे सामने प्रस्तुत किया है ऐसा गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने भी लिखा है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 100 साल पहले यह बताया था कि भारतीय इतिहास का पुनः लेखन होना चाहिए। अंग्रेजों ने जिस भारतीय इतिहास के सुनहरे पन्नों को छुपा कर रखा उसमें से ही एक सुनहरा पन्ना महाराजा सुहेलदेव जी का भी है। महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम के कारण डेढ़ सौ साल तक किसी भी विदेशी आक्रांता ने भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देखा और उनकी हिंदुस्तान पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं हुई ऐसा अद्भुत पराक्रम महाराजा सुहेलदेव जी ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रीमान परमेश्वर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि महाराजा सुहेलदेव भगवान सूर्य के उपासक थे। बहराइच में सूर्यकुंड पर स्थित भगवान सूर्य की मूर्ति की वे पूजा करते थे। सालार मसूद के बहराइच आने पर महाराजा सुहेलदेव ने आस-पास के 21 महाराजाओं का गठबंधन बनाकर उससे लोहा लिया और सालार मसूद को बुरी तरह परास्त किया। जून, 1034 ई. को हुई इस लड़ाई में प्रत्येक हिंदू परिवार से युवा हिंदू इस लड़ाई मे सम्मिलित हुए। महाराजा सुहेलदेव के शामिल होने से हिंदूओं का मनोबल बढ़ा हुआ था। सैयद सालार मसूद गाजी को उसकी डेढ़ लाख इस्लामी सेना के साथ समाप्त करने के बाद महाराजा सुहेल देव ने विजय पर्व मनाया और इस महान विजय के उपलक्ष्य में कई पोखरे भी खुदवाए। भारत की अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने का काम महाराजा सुहेलदेव ने किया इसलिए उनके नाम के प्रति सम्मान व्यक्त करना हर भारतीय का दायित्व है।
डा. सुनेत्री सिंह (वरिष्ठ आयुर्वेद व पंचकर्म विशेक्षज्ञ) ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया तथा साप्ताहिक वेबिनार का संचालन डा. सुनिता जेटली (एसोसिएट प्रोफेसर, आचार्य नरेन्द्र देव काॅलेज, दिल्ली) ने किया।

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