नोएडा में RTE के नियम को धुँए मे उड़ाया , 2765 EWS बच्चों को 50 निजी स्कूलों ने नहीं दिया दाखिला, शिक्षा विभाग ने थमाया नोटिस

नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) जैसी महत्वकांक्षी योजना पर गौतमबुद्ध् नगर जनपद के निजी स्कूलों ने पानी फेर दिया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 50 से अधिक निजी स्कूलों ने 2765 से अधिक गरीब बच्चों के दाखिले लेने से ही मना कर दिया है। सबसे बुरी स्थिति बिसरख ब्लॉक के ग्रेटर नोएडा वेस्ट की है, जहां पर निजी स्कूलों ने गरीब बच्चों का एडमिशन लेने से साफ इनकार कर दिया है।
अब बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। आरटीई के तहत दुर्बल आय वर्ग (EWS) के बच्चों का प्रवेश गैर सहायता प्राप्त विद्यालय में कराए जाने के प्रक्रिया जुलाई 2020 से जारी है। 2020-21 के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राप्त किए थे। पहले दो चरण में कुल 6261 आवेदन मिले थे। आवेदन के आधार पर डीएम के समक्ष ऑनलाइन लॉटरी द्वारा पहले और दूसरे चरण में कुल 3717 छात्र-छात्राओं का विद्यालय आवंटित हुआ था, जिनमें से 952 बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों ने कर लिया गया था। शेष 2765 बच्चों के प्रवेश के लिए संबंधित विद्यालयों को दिशा-निर्देश बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए थे। मगर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के 50 से अधिक स्कूलों ने दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने से ही मना कर दिया। सबसे बुरी स्थिति बिसरख ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निजी स्कूलों की है। ग्रेनो वेस्ट में 20 से अधिक निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट के स्कूलों के संबंध में अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा विभाग के पोर्टल, सोशल मीडिया और लिखित में काफी शिकायतें दर्ज कराई है। इस पर अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिया गया है, जिसके बाद जनपद के 58 विद्यालयों को पहली बार नोटिस दिया गया है, जबकि 22 स्कूलों को दूसरा नोटिस भी जारी किया गया है। जिन विद्यालयों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें अधिकांश स्कूल ग्रेनो वेस्ट के हैं। जिन विद्यालयों को दोबारा नोटिस जारी किए गए हैं उनसे जल्द से जल्द जवाब मांगा गया है।

★ क्या है आरटीई ( RTE) ?
6 से 14 साल के हर बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) बनाया गया। पूरे देश में यह अधिनियम अप्रैल 2010 से लागू हो गया था। इस अधिनियम में साफ लिखा है कि निजी स्कूल 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश देंगे।

● शिकायतों के त्वरित निपटाने को 6 सदस्य समिति गठित :-

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ विद्यालयों ने आरटीई कोटे के तहत बच्चों के प्रवेश नहीं लिए हैं, जिसकी अभिभावकों ने शिकायत की है। इन शिकायत के त्वरित निस्तारण के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इसमें बिसरख ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश गुप्ता को अध्यक्ष, दनकौर के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह पवार को सदस्य/सचिव, दादरी के खंड शिक्षा अधिकारी हेमेंद्र सिंह को सदस्य, वरिष्ठ सहायक कपिल कुमार को सदस्य, वरिष्ठ सहायक रविंद्र पाल को सदस्य और लेखाकार अभिषेक गुप्ता को सदस्य नियुक्त किया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि जिन विद्यालयों ने आरटीआई के तहत बच्चों के प्रवेश नहीं दिए हैं, उनको नोटिस जारी किए गए हैं। विद्यालयों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया जाएगा।

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