कृषि अधिनियम 2020 तकनीक के सदी का क्रांतिकारी प्रयोग: चेतन

(विशेष संकलन:चेतन वशिष्ठ):कृषि अधिनियम 2020 तकनीकी इस सदी का एक क्रांतिकारी प्रयोग है सर्वविदित है 21वीं सदी में तकनीक के माध्यम से ही आम लोगों के जीवन में विकास तेजी से हो रहा है. जो देश या समाज तकनीक से दूर है उनका विकास का रफ्तार भी धीमा है .आज कोरोना  वैश्विक महामारी में भी हम लोगों ने यह देखा कि बच्चों की पढ़ाई ,बुजुर्गों की दवाई, पेंशन आदि कई कार्य तकनीक के माध्यम से ही किए जा रहे हैं ,तो इस परिदृश्य को देखते हुए आज क्यों ना हमारे किसान अपने ऊपर को किसी मोबाइल ऐप के जरिए अच्छे मुनाफे के साथ बेच सकते हैं| उदाहरण स्वरूप (ग्रेटर नोएडा) जेवर के आसपास रह रहे किसानों को अगर लगातार छोटी-छोटी समस्याएं होती है .जैसे कि फसल की उपज होने के बाद बोरी ( बारदाना) की समस्या, कांटे पर अनाज के तौल करवाने के लिए घंटों इंतजार करना, बाजार तक फसल को बेचने आने के लिए हजारों रुपए खर्च करना, उचित भंडारण व रखरखाव आदि कई समस्याएं होती हैं। परंतु जब ओपन मार्केट होगा तब बहुत जल्द यह भी देखने को मिलेगा की ग्रामीण किसान भाई का जो भी उपज हुआ है, उसकी जानकारी मोबाइल एप और वेबसाइट के माध्यम से साझा कर देंगे और व्यापारी उनके खलिहान घर तक जाकर अनाज को खरीदेगा।

उल्लेखनीय है कि कृषि अधिनियम 2020 जब केंद्र सरकार के द्वारा पारित कर दिया गया है तब इसका विरोध मुख्य रूप से पंजाब हरियाणा में किया जा रहा है वही कई अन्य राज्यों में भी लोग इसका विरोध करते हुए दिख रहे हैं जैसे कि बिहार में आरजेडी और वामपंथी संगठन इसका विरोध कर रही है परंतु एक सवाल है उन राजनीतिक दलों से की जब इस विधेयक के कई अहम बिंदु पर बिहार सरकार ने 2006 में ही विधेयक पारित किया था तब आप इतना विरोध क्यों नहीं कर रहे थे, ठीक उसी तरह से जब महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी तब भी इस विधेयक के कई अहम बिंदु के ऊपर विधेयक लाया गया था तब शरद पवार और कांग्रेस इसका विरोध नहीं कर रहे थे इस तरह के दर्जनों उदाहरण दिए जा सकते हैं।

क्रमशः तीनों कृषि अधिनियमों के प्रावधानों, उनके लाभ तथा चुनौतियों को समझने का प्रयास किया जाएगा।

कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्द्धन एवं सुविधा) अधिनियम, 2020

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में किसानों को अपनी उपज की बिक्री में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, किसानों के लिये अधिसूचित कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) वाले बाज़ार क्षेत्र के बाहर कृषि उपज की बिक्री पर कई तरह के प्रतिबंध थे।
  • किसानों को केवल राज्य सरकारों के पंजीकृत लाइसेंसधारियों को उपज बेचने की बाध्यता भी निर्धारित थी साथ ही राज्य सरकारों द्वारा लागू विभिन्न APMC विधानों के कारण विभिन्न राज्यों के बीच कृषि उपज के मुक्त प्रवाह में भी बाधाएँ बनी हुई थी।

लाभ

  • इस अधिनियम के माध्यम से एक नए पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना में सहायता मिलेगी जहाँ किसानों और व्यापारियों को कृषि उपज की खरीद और बिक्री के लिये अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
  • यह अधिनियम राज्य कृषि उपज विपणन कानून के तहत अधिसूचित बाज़ारों के भौतिक परिसर के बाहर अवरोध मुक्त अंतर्राज्यीय और राज्यांतरिक व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देता है।
  • इस अधिनियम के माध्यम से अधिशेष उपज वाले क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज पर बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और साथ ही कम उपज वाले क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अनाज प्राप्त हो सकेगा।
  • इस अधिनियम में कृषि क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग का भी प्रस्ताव किया गया है।
  • इस अधिनियम के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री पर कोई उपकर या लगान नहीं लिया जाएगा। साथ ही इसके तहत किसानों के लिये एक अलग विवाद समाधान तंत्र की स्थापना का प्रावधान भी किया गया है।

मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अधिनियम, 2020

पृष्ठभूमि

  • भारतीय किसानों को छोटी जोत, मौसम पर निर्भरता, उत्पादन और बाज़ार की अनिश्चितता के कारण कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन कमज़ोरियों के कारण आर्थिक दृष्टि से कृषि में बहुत अधिक जोखिम होता है।

लाभ 

  • यह विधेयक किसानों को बगैर किसी शोषण के भय के प्रसंस्करणकर्त्ताओं, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगा।
  • इसके माध्यम से किसान प्रत्यक्ष रूप से विपणन से जुड़ सकेंगे, जिससे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त होगी और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
  • इस विधेयक से कृषि उपज को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने हेतु आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण तथा कृषि अवसंरचना के विकास हेतु निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020

पृष्ठभूमि 

  • इस संशोधन के अंतर्गत अकाल, युद्ध, आदि जैसी असामान्य परिस्थितियों के कारण कीमतों में अत्याधिक वृद्धि तथा प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में कुछ निर्दिष्ट कृषि उपजों की आपूर्ति, भंडारण तथा कीमतों को नियंत्रित किये जाने का प्रावधान किया गया है।

लाभ

  • इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने विनियामक वातावरण को उदार बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाए। संशोधन विधेयक में यह व्यवस्था की गई है कि युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि‍ उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • इस संशोधन के माध्यम से न केवल किसानों के लिये बल्कि उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिये भी सकारात्मक माहौल का निर्माण होगा और यह निश्चित रूप से हमारे देश को आत्मनिर्भर बनाएगा।
  • इस संशोधन से कृषि क्षेत्र की समग्र आपूर्ति श्रृंखला तंत्र को मज़बूती मिलेगी। इस संशोधन के माध्यम से इस कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर किसान की आय दोगुनी करने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

(संकलनकर्ता चेतन वशिष्ठ भाजयुमो नेता व स्तंभकार) (स्तंभकार के विचार निजी हैं)

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