शारदा विश्विद्यालय:  आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग पर कॉन्फ्रेंस आयोजित

ग्रेटर नोएडा :  शारदा यूनिवर्सिटी की ओर से इंटरनैशनल काॅन्फ्रेंस ऑन  एडवांस एंड एप्लीकेशन ऑफ़  आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग पर आयोजित दो दिवसीय काॅन्फ्रेंस का शुक्रवार को समापन हो गया। इस मौके पर यूएस, यूके, यूएई, नाॅर्वे इथोपिया और अन्य देशों के स्काॅलर ऑनलाइन जुडकर अपने विचार रखे।
इस मौके पर शारदा विश्वविद्यालय के चांसलर पी के गुप्ता ने कहा कि आज के दौर में स्वास्थ्य देखभाल, विनिर्माण, खुदरा, खेल, स्पेस स्टेशन, बैंकिंग जैसे हर क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की जरूरत है। इन सभी कार्य क्षेत्रों में इस तरह की मशीनों की काफी मांग है। जिस कार्य को इंसानों द्वारा करने में कई महीनें लग जाते हैं वो इन मशीनों के जरिए जल्द किया जा सकता है। जहां पर इंसान का दिमाग एक जगह आकर सोचना बंद कर देता है वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ ऐसा नहीं है। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की महत्ता तो है, लेकिन हमारे समाज में हयूमन सिविलाइजेशन का गहरा असर है।
शारदा विश्वविद्यालय के वीसी शिबाराम खारा ने बताया कि किस तरह अलग अलग क्षेत्र में इनका इस्तेमाल किया जा रहा है और क्यों ये हम लोगों के लिए जरूरी है। चिकित्सा अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से कई सारे कार्य आसानी से किए जा रहे हैं। इससे अनुसंधान में मदद करने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं आज मशीन से इंसानों का ऑपरेशन भी हो रहा है।स्कूल आफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. परमानंद ने बताया कि अंतरिक्ष से जुडी खोजों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने शारदा के छात्रों के बनाए रोबोट पर प्रकाश डाला और विवि की भविष्य की योजनाओं से रूबरू कराया। मशीन लर्निंग कृत्रिम बुद्धि का ही एक भाग है। वहीं इन दोनों के अंतर की बात की जाए तो ये दोनों चीजे एक दूसरे से काफी अलग हैं। मशीन लर्निंग के जरिए कंप्यूटर को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वो डेटा के आधार पर फैसला ले सके। एशिया पेसिफिक इंस्टीटयूट मलेशिया के प्रो डाॅ आर लोगेश्वरन ने डेटा की प्रमुखता पर जोर देते हुए कहा कि कैसे यह हमारे जीवनशैली को प्रभावित करता है। आईआईटी कानपुर के प्रफेसर डाॅ एस एन सिंह ने भी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की उपयोगिता और भविष्य में होने वाली गतिविधियों का रोडमैप शेयर किया।
काॅन्फ्रेंस के दूसरे दिन एजुकेशन 4.0 में यह कैसे मददगार साबित हो रहा है, इस पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत और नाइजीरिया के नामी स्कूलों के प्रिंसिपल और शिक्षाविद जुडे। कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के मूलभूत थ्योरी पर प्रकाश डाला। इसमें बताया गया कि इस तकनीकी का उपयोग कर शिक्षक छात्रों को कैसे बेहतर बना सकते हैं। कटूका इन्फो नाइजीरिया के सलाहकार सालिहु ओमेही ने बताया कि उनके देश में इस नई तकनीकी से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आई। शिव नडार स्कूल नोएडा की प्रिंसिपल शशि बनर्जी और खेतान स्कूल नोएडा की प्राचार्य रीना सिंह ने कहा कि उनके स्कूलों में इस तकनीकी का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है और बच्चों को अपडेट रखा जाता है।

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