जानिए क्या होता है मलमास,कब होता है आरम्भ, बता रहे हैं पं. मूर्तिराम आनन्द बर्द्धन नौटियाल

सूर्य के बृहस्पति की धनुराशि में गोचर करने से खरमास, मलमास शुरू होता है । यह स्थिति मकरसंक्रान्ति तक रहती है। इस कारण मांगलिक कार्य नहीं होते है। जैसे ही सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तभी से मलमास आरम्भ हो जाता है और इसी के साथ शादी विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य निषेध हो जाते है।

मलमास में सूर्य धनु राशि का होता है। ऐसे में सूर्य का बल वर को प्राप्त नहीं होता। इस वर्ष आज 18 सितम्बर 2020 से 16 अक्टूबर 2020 तक मलमास रहेगा। वर को सूर्य का बल और वधू को बृहस्पति का बल होने के साथ ही दोनों को चंद्रमा का बल होने से ही विवाह के योग बनते हैं। इस पर ही विवाह की तिथि निर्धारित होती है।

मलमास शुरू हो जाने से विवाह संस्कारों पर एक माह के लिए रोक लग जाएगी। साथ ही अनेक शुभ संस्कार जैसे जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश भी नहीं किया जाएगा। हमारे भारतीय पंचांग के अनुसार सभी शुभ कार्य रोक दिए जाएंगे। मलमास को कई लोग अधिक मास भी कहते हैं। अधिक मास कई नामों से विख्यात है। इस महीने को अधिमास, मलमास, और पुरुषोत्तममास के नाम से पुकारा जाता है। शास्त्रों में मलमास शब्द की यह व्युत्पत्ति निम्न प्रकार से बताई गई हैः

‘मली सन् म्लोचति गच्छतीति मलिम्लुचः’

अर्थात् ‘मलिन (गंदा) होने पर यह आगे बढ़ जाता है।’

हिन्दू धर्म ग्रंथों में इस पूरे महीने मल मास में किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही है।जब गुरु की राशि में सूर्य आते हैं तब मलमास का योग बनता है। वर्ष में दो मलमास पहला धनुर्मास और दूसरा मीन मास आता है। सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से विवाह संस्कार आदि कार्य निषेध माने जाते हैं। विवाह और शुभ कार्यों से जुड़ा यह नियम मुख्य रूप से उत्तर भारत में लागू होता है जबकि दक्षिण भारत में इस नियम का प्रभाव शून्य रहता है। मद्रास, चेन्नई, बेंगलुरू में इस दोष से विवाह आदि कार्य मुक्त होते हैं।

मलमास में व्रत का महत्व
==================
जो व्यक्ति मलमास में पूरे माह व्रत का पालन करते हैं उन्हें पूरे माह भूमि पर ही सोना चाहिए. एक समय केवल सादा तथा सात्विक भोजन करना चाहिए. इस मास में व्रत रखते हुए भगवान पुरुषोत्तम अर्थात विष्णु जी का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए तथा मंत्र जाप करना चाहिए. श्रीपुरुषोत्तम महात्म्य की कथा का पठन अथवा श्रवण करना चाहिए. श्री रामायण का पाठ या रुद्राभिषेक का पाठ करना चाहिए. साथ ही श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता है.

मल मास के आरम्भ के दिन श्रद्धा भक्ति से व्रत तथा उपवास रखना चाहिए. इस दिन पूजा – पाठ का अत्यधिक महात्म्य माना गया है. मलमास मे प्रारंभ के दिन दानादि शुभ कर्म करने का फल अत्यधिक मिलता है. जो व्यक्ति इस दिन व्रत तथा पूजा आदि कर्म करता है वह सीधा गोलोक में पहुंचता है और भगवान कृष्ण के चरणों में स्थान पाता है.

मल मास की समाप्ति पर स्नान, दान तथा जप आदि का अत्यधिक महत्व होता है. इस मास की समाप्ति पर व्रत का उद्यापन करके ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और अपनी श्रद्धानुसार दानादि करना चाहिए. इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मलमास माहात्म्य की कथा का पाठ श्रद्धापूर्वक प्रात: एक सुनिश्चित समय पर करना चाहिए.

इस मास में रामायण, गीता तथा अन्य धार्मिक व पौराणिक ग्रंथों के दान आदि का भी महत्व माना गया है. वस्त्रदान, अन्नदान, गुड़ और घी से बनी वस्तुओं का दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है।

जय माता दी जी जगदम्बा ज्योतिष केन्द्र पं. मूर्तिराम आनन्द बर्द्धन नौटियाल ज्योतिषाचार्य देवी (नृसिंह उपासक गंगौत्री धाम)फोन नम्बर +919310110914

यह भी देखे:-

आज का पंचांग, 30 अक्टूबर 2020 , जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त 
आज का पंचांग, 13 जनवरी 2021, जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
आज का पंचांग, 12 दिसंबर 2020, जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त 
आज का पंचांग, 9 नवंबर 2020, जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में किया भक्तों ने जलाभिषेक
आज का पंचांग, 26 सितम्बर 2020, जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
श्री साईं अक्षरधाम मंदिर डेल्टा 3 : सामुहिक सुन्दरपाठ व भण्डारे का आयोजन
ग्रेटर नोएडा में छठ पूजा की तैयारी जोरों पर, जानिए कहां बन रहा है घाट, कहां होगा भोजपुरी कार्यक्रम
करवा चौथ कल  4 नवंबर को, जानिए  महत्त्व , कैसे करें पूजा 
माँ अहिल्या सेवा संस्था द्वारा एक भव्य भंडारे का आयोजन
आज का पंचांग, 11  सितम्बर 2020 , जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त 
कायस्थ समाज ने की भगवान श्री  चित्रगुप्त व कलम दवात की पूजा, विशाल भंडारे का हुआ आयोजन 
जी. डी. गोयंका में गुड फ्राईडे के उपलक्ष्य में प्रार्थना सभा का आयोजन
आज का पंचांग, 19  सितम्बर 2020 , जानिए शुभ एवं अशुभ मुहूर्त 
नहायखाय के साथ सूर्योपसना का महापर्व छठ आज से शुरू, जानिए इसकी खासियत
देखें VIDEO, आर्षायण ट्रस्ट ने मनाया मकर संक्रांति उत्सव , 15 कुण्डीय यज्ञ में लोगों ने दी आहुति