शारदा डेंटल कॉलेज में दांतों के मरीज़ों का इलाज शुरू

कोरोना महामारी से न केवल लोगों की सामान्य दिनचर्या प्रभावित हुई है बल्कि अन्य तरह की तकलीफ होते हुए भी लोग हॉस्पिटल जाने से बच रहे हैं। ओपीडी में रोगियों की संख्या भी घटी है। ऐसे में स्कूल ऑफ़ डेंटल साइंसेज के शारदा डेंटल अस्पताल ने डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया की गाइडलाइन्स के हिसाब से इलाज करना शुरू कर दिया है। सोमवार से सर्जरी और अन्य सेवाएं शुरू कर दी गयी हैं। इसके अलावा मेडिकल हिस्ट्री देख कर डॉक्टर्स फोन पर भी इलाज और दवा बता रहे हैं।
शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ डेंटल साइंस के डीन डॉक्टर सिद्धार्थ एम ने बताया कि हमने 4 अगस्त से डेंटल ओपीडी शुरू कर दी। सोमवार से सर्जरी और अन्य सेवाओं को चालू कर दिया गया। इसमें पहले से अपॉइंटमेंट लिए मरीज़ों को देखा जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान हमलोग फोन पर अपने रोगियों के साथ संपर्क में रहे। संस्थान ने अब सर्जरी भी शुरू कर दी है। यहाँ सोशल डिस्टन्सिंग का खास ख्याल रखा जा रहा है। हॉस्पिटल में अनावश्यक भीड़ से भी बचा रहा है। साथ ही दो पेशंट के बीच कम से कम 1 घंटे का गैप दिया जा रहा है। इस कारण डेंटिस्ट्स एक दिन में सीमित मरीज ही देख रहे हैं। ताकि मरीज और डॉक्टर दोनों कोरोना वायरस से सुरक्षित रहें।
डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा कोरोना को ध्यान में रखते हुए मरीज और डॉक्टर की सुरक्षा के लिए कुछ नए नियम जोड़े गए हैं, इस कारण इलाज के तरीके में थोडा सा बदलाव हुआ है। इसे मोडिफाइ किया गया है। एंट्री से पहले पेशंट की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। चेकअप के लिए चेयर पर लेटाने से पहले माउथ वॉश और माउथ क्लिनर का उपयोग कराया जा रहा है ताकि जर्म्स का खतरा कम किया जा सके। सेनिटाइजर या किसी दूसरे मेडिकेटेड ऑइनमेंट से पहले फेस को वाइप किया जा रहा है। चेयर पर लेटाने के बाद पेशंट को ड्रेप किया जाएगा ताकि पेशंट और डॉक्टर का किसी तरह का टच ना हो। इसके बाद डॉक्टर पीपीई किट पहनकर, सर्जिकल ग्लव्स और मास्क के साथ ही पेशंट का चेकअप करता है। एक पेशंट के चेकअप के बाद पूरे रूम को और वहां रखी हर चीज को सोडियम हाइपो क्लोराइड के सॉल्यूशन से सैनिटाइज किया जाता है। उन्होंने बताया कि रुट कैनाल और क्राउन कटिंग और स्केलिंग जैसे प्रसीजर एजीपी एरोसोल जनरेटेड प्रसीजर हैं, जिन्हें हमेशा ही हाईजीन को ध्यान में रखकर किया जाता है। लेकिन कोरोना के कारण इसमें और अधिक सख्ती की जा रही है।

अस्पताल के प्रवक्ता डॉक्टर अजित कुमार ने बताया कि कोरोना काल से पहले डेंटल ओपीडी में 300 से 350 मरीज़ आते थे। फ़िलहाल 30 से 35 रोगी ही आ रहे हैं। हमारे पास 80 से अधिक डॉक्टरों और स्टाफ से सुसज्जित दंत विज्ञान विभाग है। यह सब तब बंद हो गया जब अस्पताल को L3 कोविड  सुविधा में बदल दिया गया। मुंह के भीतर उपचार संबंधी विशिष्टताओं के कारण चिकित्सकीय सेवाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था। अब दोबारा से मरीज़ आने शुरू हुए हैं। हालाँकि उनमें डर का माहौल है, लेकिन अस्पताल में सुरक्षा के पुरे इंतज़ाम हैं। आने वाले दिनों में मरीज़ों का आंकड़ा बढ़ेगा।

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