पॉलिथीन पर्यावरण को प्रदूषित करने में सबसे बड़ा घटक : श्री राकेश जैन

नोएडा । प्रेरणा मीडिया द्वारा ‘कोरोना काल में प्रकृति का संदेश एवं पर्यावरण के प्रति हमारा सामाजिक दायित्व’ विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबिनार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण विभाग के सह संयोजक श्री राकेश जैन ने संबोधित किया।

श्री राकेश जैन ने वेबीनार को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा के ग्वालियर बैठक में पर्यावरण नाम से एक नई गतिविधि की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि संघ ने तीन बिंदुओं- पेड़ लगाओ, पानी बचाओ, पॉलिथीन हटाओ को ध्यान में रखकर पर्यावरण विषय पर काम को आगे बढ़ाया।

राकेश जैन ने दिल्ली का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में नवंबर और दिसंबर में प्रदूषित हवा के कारण जो दम घोटू वातावरण रहता है उसका कारण पेड़ों का कम होना, पश्चिमी हवाओं से धूल के कणों का दिल्ली में प्रवेश और दिल्ली की बाहरी सीमाओं पर 3 बड़े कूड़े के ढेरों का होना है। इन कूड़े के ढेरों में एक लाख 40 हजार करोड़ टन कूड़ा पड़ा हुआ है जो 70 एकड़ में फैला हुआ है और इनकी ऊंचाई कुतुबमीनार से दुगनी है। दिल्ली के गाजीपुर में, मकरबा चौराहे के पास और द्वारका स्थित इन कूड़े के ढेरों से जो जहरीली गैस निकलती है उनसे भी दिल्ली का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

राकेश जैन ने पेड़ो की महत्ता स्पष्ट करते हुए कहा कि पेड़ों के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पानी को बनाया नहीं जा सकता अपितु पानी को केवल बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पॉलिथीन पर्यावरण को प्रदूषित करने में सबसे बड़ा घटक है। खाने के अवशेषों को पॉलिथीन में रखकर लोगों द्वारा फेंकने से गोवंश की जान खतरे में है क्योंकि सड़क पर घूमने वाले गोवंश इन पॉलिथीनों को खा जाते हैं जिससे उनकी जान चली जाती है। इस पॉलिथीन का निस्तारण करने की आवश्यकता है। पॉलिथीन को जमीन पर नहीं डालने का संकल्प सभी नागरिकों को लेना होगा।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कल्याण सिंह रावत ने उत्तराखंड में चल रहे मैती आंदोलन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण को सार्थक तथा प्रभावी रूप से सफल बनाने के लिए उन्होंने भावनात्मक स्वरूप देकर मैती आंदोलन की आधारशिला रखी।

मैती आंदोलन के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें विवाह उत्सव पर बेटी अपने जीवन साथी के साथ मिलकर एक यादगार वृक्ष लगाती है। बेटी के विदा होने के बाद स्वत: ही मां अपनी बेटी के लगाए पेड़ की सुरक्षा तथा देखभाल की जिम्मेदारी बड़ी सजगता के साथ करती है। गांव की बेटियों के द्वारा शादी में लगाए गए यह पेड़ गांव के भविष्य के खुशहाली और समृद्धि के कारक बन जाते हैं।

उन्होंने बताया की 1995 से अब तक लगभग 5 लाख से अधिक शादियों में पेड़ लग चुके हैं। वृक्षारोपण का यह आंदोलन अब एक प्राकृतिक संस्कार का रूप ले चुका है। कई राज्यों और देशों ने इस पहल को स्वीकारोक्ति दी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मेरठ सिविल कोर्ट के अधिवक्ता श्री सतीश कुमार बालियान ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रेरणा मीडिया सेंटर के कार्यक्रम संयोजक प्रमोद कामत ने की। प्रमोद कामत ने बताया कि आगामी 21, 22 और 23 जुलाई को प्रेरणा मीडिया सेंटर द्वारा खिलाफत आंदोलन विषय पर वेबीनार का आयोजन किया जाएगा जिसमें गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति श्री भगवती प्रकाश शर्मा खिलाफत आंदोलन के तथ्यों को दर्शकों के सामने रखेंगे।

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