150 ग्राम की नैनो ड्रोन बचाएगी रैंगिग से, पढ़ें पूरी खबर

  • इस में लगी टेक्नोलॉजी किसी नार्मल और रैंगिक की गतिविधियों के बीच अंतर को पहचान सकती है.
  • पूरी तरह से स्वचालित है और एक चार्ज डॉक पर टेक ऑफ और लैंड करेगा
  • यह नैनों ड्रोन 10 फिट की उचाई पर उड़ेगा
  • 3D पोज एस्टिमेशन अल्गोरिथम की तकनीक का किया इस्तेमाल

हमारे देश में कॉलेज के अन्दर रैंगिग से निबटना एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। रैगिंग एक ऐसा शब्द है जो हर साल कॉलेज शुरू होते ही सुनाई देने लगता है। दुनियाभर में हर साल लाखों स्टूडेंट्स को इसका सामना करना पड़ता है और यह भयावह रूप ले चुका। क्योंकि कई बार रैगिंग के कारण स्टूडेंट्स को अपनी जान तक गवानी पड़ती है। रैगिंग की चुनौती से निबटने के लिए ग्रेटर नोएडा शहर में स्थित आईआईएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज की R&D सेल की टीम ने एक ऐसे नैनो ड्रोन का आविष्कार किया है जो कॉलेज परिसर में होने वाली रैंगिग को डिडेक्ट कर कॉलेज की रैंगिकग कमेटी को सुचित करेगा। इसकी खास बात यह है कि इसमें 3D पोज एस्टिमेशन अल्गोरिथम की तकनीक को इस्तेमाल किया गया है। अगर इसके साईज और वजन की बात करें तो यह आम मोबाइल सें कम है। इसमें लगे कैमरे में डीप लर्निग टेक्निक्स का इस्तेमाल किया गया। यह टेक्नोलॉजी किसी नार्मल और रैंगिक की गतिविधियों के बीच अंतर को पहचान सकती है। इस नैनों ड्रोन को उन जगह के लिए बनाया गया है जहां पर नार्मल कैमरे नहीं लगाए जा सकते हैं। यह नैनों ड्रोन 10 फिट की उचाई पर उड़ेगा। यह पूरी तरह से स्वचालित है और एक चार्ज डॉक पर टेक ऑफ और लैंड करेगा। जैसे ही यह नैनो ड्रोन चार्ज डॉक पर लैंड करेगा तो डॉक चार्ज पर पहले से मौजूद दूसरा नैनो ड्रोन उड़कर पहले वाले के स्थान पर पहुंच जाएगा।

सीएसआईआर रिटायर्ड साइंटिस्ट प्रोफेसर महाजन के गाईगेंस में थर्ड ईयर के छात्र डेविड और तुषार गौरव ने पूरे नैनो ड्रोन का डिजाइन और हार्डवेयर को इजाद किया है। वहीं रिसर्च साइंटिस्ट मयंक राज ने इस ड्रोन में 3D पोज एस्टिमेशन के जरिये रैगिंग डिटेक्ट करने वाली अल्गोरिथम को डवल्प किया है। उन्होंने बताया कि ड्रोन को हल्का और छोटा बनाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। छात्र डेविड और तुषार गौरव ने आईआईएमटी के सहयोग से अपना ड्रोन स्टार्टअप रूद्र रोबोटिक्स पंजीकरत किया है। इसके तहत आईआईएमटी के साथ मिलकर कई सारे प्रोडेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

वहीं छात्र तुषार और गौरव ने बताया कि जब MSME के अधिकारियों ने कॉलेज में विजीट की तो उन्होंने हमारे इस प्रोजेक्ट को काफी पसंद किया। इस मौके पर MSME के अधिकारियों ने कहा कि भारत SURVEILLANCE के क्षेत्र में काफी तेजी विकास कर रहा है। दूसरी तरफ छात्रों ने बताया कि उन्होंने इस नैनो ड्रोन का पेटेंट भी फाइनल कर दिया है। वहीं आईआईएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रबंध निदेशक मयंक अग्रवाल ने इस काम के लिए पूरी टीम को बधाई दी है।

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