शारदा विश्विद्यालय पहुंचे आईएएस 3rd टॉपर जुनैद अहमद, अपने अनुभव और सुझावों को साझा किया
ग्रेटर नोएडा: शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विषय में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के जीवन में जोश और उत्साह भरने के लिए प्रेरणादायक वार्ता का आयोजन किया गया । इस वार्ता में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले शारदा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र जुनैद अहमद ने अपने विद्यार्थी जीवन से अपनी भारतीय प्रशासनिक सेवक बनने की यात्रा के बारे में विद्यार्थियों को बताया | स्वागत स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन डॉ परमानन्द ने स्मृति चिन्ह भेट करके किया ।
श्री अहमद ने कहा कि वह आज शारदा विश्वविद्यालय में अपनी भारतीय प्रशासनिक सेवक के रूप में अपने जीवन की नई पारी के लिए अपने शिक्षकों से आशीर्वाद लेने आया हूँ । उन्होंने शारदा विश्वविद्यालय में अपने यादगार दिनों को याद किया और छात्रों के साथ यू.पी.एस.सी. सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के अपने अनुभव और सुझावों को साझा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए उनकी सफलता का पहला मंत्र उद्देश्य रखना है, उद्देश्य के बिना जीवन दिशाहीन हो जाता है। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है कठोर परिश्रम। उन्होंने बताया मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण अपनी विफलताओं से सीखना तथा उनसे सबक लेना है।
श्री जुनैद अहमद ने छात्रों को अपने कौशल के साथ अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्रों से सरकारी सेवाओं में शामिल होने का भी आग्रह किया ताकि वे अपने समाज के लिए कुछ ऐसा कर सकें जिससे समाज निरंतर प्रगति करे ।
शारदा विश्वविद्यालय के चांसलर पी के गुप्ता ने कहा कि कठिनाई हर किसी को निराश करती है, लेकिन निरंतर दृढ़ता, कड़ी मेहनत और चैनलाइज़्ड विज़न के साथ सफलता प्राप्त करने के लिए जीवन की संकल्पना प्रबल हो जाती है। प्रो-चांसलर वाई के गुप्ता ने कहा कि जब हमारी जीतने की इच्छा होगी और सफल होने की निरंतर इच्छा शक्ति हमारे अंदर होगी तभी हम अपने लक्ष्य कि प्राप्ति कर सकेंगे । कुलपति प्रो. जी.आर.सी. रेड्डी ने कहा कि छात्रों को अपने कौशल का सही उपयोग करना चाहिए और सिविल सेवा में करियर तलाश कर समाज के प्रति अधिक झुकाव रखना चाहिए।
स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो परमानंद ने छात्रों को संबोधित किया और उन्हें सकारात्मक सोच विकसित करने और अपने स्वयं के मिशन और दृष्टि की अवधारणा करने की सलाह दी और धन्यवाद ज्ञापन किया ।
