जानिए क्यों नही लगेगा इस बार ग्रहण का सूतक : पंडित मूर्तिराम आनन्दबर्धन नौटियाल ज्योतिषाचार्य

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह चंद्र ग्रहण नहीं है यह तो केवल उपछाया चंद्र ग्रहण है। भारतीय ज्योतिशास्त्र और पंचांग के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण को चंद्र ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। यहीं कारण है कि शुक्रवार, 10 जनवरी को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं होगा। सूतक काल ग्रहण 9 से 12 घंटे पहले लग जाता है और इस अवधी में सभी तरह के धार्मिक कार्यों की मनाही होती है, परंतु इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं लगेगा जिस वजह से सभी तरह के धार्मिक कार्य भी संपन्न होंगे और मंदिरों के कपाट भी खुले रहेंगे। आइए, अब हम आपको बताते हैं क्या होता है यह उपछाया चंद्र ग्रहण…

चंद्र ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है

उपछाया चंद्र ग्रहण:-

चंद्र ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है जिस चंद्र मालिन्य कहते हैं। इसके बाद चांद पृथ्वी की वास्तविक छाया भूभा में प्रवेश करता है। जब चांद पृथ्वी की वास्तविक छाया भूभा में प्रवेश करता है तब चंद्र ग्रहण लगता है। लेकिन इस बार की तरह ही कई बार चंद्रमा उपछाया में प्रवेश करने के बाद उपछाया संकु से ही बहार निकल जाता है और भूभा में प्रवेश नहीं करता है। इसलिए उपछाया के समय चंद्रमा का बिम्ब केवल धुंधला पड़ता है, काला नहीं होता है। इस धुंधलापन को सामान्य रूप से देखना भी काफी मुश्किल होता ह इसलिए चन्द्र मालिन्य मात्र होने से इसे उपछाया चन्द्रग्रहण कहते ।

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लेखक — पंडित मूर्तिराम आनन्दबर्धन नौटियाल ज्योतिषाचार्य(देबी,नृसिहं उपासक गंगौत्री धाम)

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