आर्षायण ट्रस्ट ने मनाया मकर संक्रांति महोत्सव, 21 कुण्डीय यज्ञ में लोगों ने दी आहुति

ग्रेटर नोएडा : रविवार को गामा – 1 में आर्षायण ट्रस्ट द्वारा मकर संक्रान्ति महोत्सव आचार्य दार्शनेय लोकेश के नेतृत्व में धूम-धाम से मनाया गया| इस मौके पर के 21 यज्ञ कुण्डों में लोगों ने आहुतियाँ दीं | वैदिक विचार संघ एवं चित्रांश फाउण्डेशन ट्रस्ट, ग्रेटर नोएडा ने कार्यक्रम में सहोयग किया . पूज्य आचार्या डॉक्टर सुकामा सहित सर्व श्री विजेन्द्र सिंह आर्य, वीरेश भाटी सुमन कुमार वैदिक, विद्यासागर वर्मा और महात्मा वेद पाल के कर कमलों से दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

इस अवसर पर विश्व वारा कन्या गुरुकुल की प्राचार्या डा० सुकामा के ब्रह्मत्व में 21 कुण्डीय यज्ञों का एक सामूहिक आयोजन सम्पन्न हुआ।

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विश्ववारा कन्या गुरुकुल से आई पाञ्च ब्रह्मचारिणियों (श्वेता, कलिका, स्वाती, जया और भव्या) ने संगठन सूक्त पाठ, घनपाठ और भजन प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर विविध लोगों ने उनके गुरुकुल को अपना अपना अंशदान भी किया। जिसमें हिमाचल से आई अयोध्या देवी जी के द्वारा गुरुकुल मुर्शदपुर के बालकों के लिए किया गया 15 कम्बलों का दान और विश्ववारा कन्या गुरुकुल के लिए इंजीनियर रामपाल सिंह के द्वारा किया गया ₹10000 का दान भी शामिल है।

आचार्याश्री ने अपने प्रमुख भाषण में मकर संक्रांति शास्त्रीयता का प्रतिपादन स्पष्ट किया। पानीपत, हरियाणा से आए महात्मा वेदपाल ने श्री मोहन कृति आर्ष पत्रकम् (एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग) के लिए ₹10000 का दान करते हुए न केवल पञ्चाङ्ग की बहुत-बहुत प्रशंसा व्यक्ति की अपितु इस कार्यक्रम को अपनी ओर से भविष्य में बहुआयामी सहयोग देने का भी वचन दिया।

पूर्व राजदूत विद्यासागर वर्मा ने अष्ट विकृति पाठ की परम्परा पर गर्व करते हुए मैक्स मूलर की उस टिप्पणी का स्मरण किया जिसमें उन्होंने इस विधा को, वेदों को अक्षुण्ण और सम्पूर्णतया सुरक्षित रखने की अद्भुत विधा के रूप में उद्धृत किया था। आर्यावर्त केसरी के प्रबन्ध सम्पादक सुमन कुमार वैदिक ने अपने वक्तव्य में समाज को वैदिक पञ्चाङ्ग देने के लिए सम्पादक का आभार व्यक्त करते हुए लोगों से अपने व्रत पर्व त्योहारों को वैदिक पञ्चाङ्ग की सुसम्मत तिथियों में मनाने का अनुरोध किया।

सर्व श्री सांवरमल गोयल ‘गुरुजी’, नवीन कुलश्रेष्ठ, चन्द्रपाल यादव, अशोक कुमार यादव आगरा वाले, सतीश गैरोला, गायत्री राजपूत, शैलेंद्र श्रीवास्तव, रामप्रसाद राणाकोटी, दिनेश शर्मा,प्रभात खण्डेलवाल आमोद सिंह, प्रीतम सिंह आर्य, अशोक कुमार सिंह एवं विनोद शर्मा ने कार्यक्रम संचालन में विशेष सहभाग किया।

अपने समापन भाषण में आचार्य दार्शनेय लोकेश ने ऋग्वेद, विष्णु पुराण और शिव महापुराण के प्रत्यक्ष उद्धरण रखते हुए स्पष्ट किया कि वास्तविक मकर संक्रांति सूर्य की परम दक्षिण क्रान्ति के साथ ही सम्भव है और वह तिथि 22 दिसम्बर है। जनवरी में मकर संक्रांति सम्भव ही नहीं है। इसी से स्नान-दान-पुण्य, मन्त्र पाठ, व्रत आदि जो भी करना हो वह आज ही के करने से आपको धार्मिक लाभ देगा। अन्यथा तिथियों में इसका धार्मिक लाभ नहीं है।

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