शारदा विश्वविद्यालय में कार्यशाला , दन्त रोगों की चुनौतियों पर हुई चर्चा

शारदा विश्वविद्यालय (SHARDA UNIVERSITY) में स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज (SCHOOL OF DENTAL SCIENCE) के डिपार्टमेंट ऑफ़ पीरियोडोंटोलॉजी ( PERIODONTOLOGY) , स्किल एन्हांसमेंट एकेडमी ने इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियंडोंटोलॉजी ( PERIODONTOLOGY) के साथ संयुक्त रूप से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया ।

इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियंडोंटोलॉजी के उपाध्यक्ष डॉ. मनीष. खत्री इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि और तीन विशिष्ट अतिथि डॉ.नरेंद्र सिंह, डॉ. एस.पी. सिंह और डॉ पल्लवी शर्मा उपस्थित थे ।

मुख्य अतिथि और तीन विशिष्ट अतिथियों का स्वागत शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज (dental sciences) के डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ ने किया। विभिन्न कॉलेजों और निजी चिकित्सकों के १५० विभिन्न वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने इस कार्यशाला में भाग लिया

डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ ने कहा की पीरियोडॉन्टल टिशू रीजनरेशन हमेशा पीरियडोंटिस्ट्स के लिए एक चुनौती रही है जो इसकी संरचनात्मक जटिलता के कारण होती है। हालांकि एक बहु-विषयक क्षेत्र के रूप में ऊतक इंजीनियरिंग के साथ, इस उद्देश्य को आंशिक रूप से पूरा किया गया है। हाल के वर्षों में, प्लेटलेट-समृद्ध फाइब्रिन (पीआरएफ) ने न केवल दंत चिकित्सा में बल्कि चिकित्सा क्षेत्रों में भी एक जैव-रासायनिक पुनर्योजी सामग्री के रूप में इसके उपयोग के लिए व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियंडोंटोलॉजी के उपाध्यक्ष डॉ. मनीष. खत्री ने कहा की इस कार्यशाला से पीरियडोंटोलॉजी में ज्ञान और कौशल के संबंध में उल्लेखनीय और अभूतपूर्व वृद्धि होगी इसलिए ऐसी कार्यशालाओं का निरंतर आयोजन होना चाहिए।

तीन विशिष्ट अतिथि डॉ.नरेंद्र सिंह, डॉ. एस.पी. सिंह और डॉ पल्लवी शर्मा ने अपने व्याख्यान में पीआरएफ और विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। पेरिओडोन्टोलोग्य में इसकी भूमिका रोगी के स्वयं के रक्त से तैयार एक ऑटोलॉगस प्लेटलेट है। हाल के शोधों में चिकित्सीय विकल्पों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जो तैयार करने में आसान हैं, जीवित ऊतकों के लिए बायोकम्पैटिबल और आर्थिक रूप से सस्ता हैं, जिसके परिणामस्वरूप हार्ड और सॉफ्ट टिशू सीलिंग और पीआरएफ में तेजी लाने वाले विकास कारकों की स्थानीय रिलीज एक ऐसा ही चमत्कार है। विभिन्न पहलुओं को कवर करके दर्शकों के मन को, जिसमें पीआरएफ एक उपचार स्पर्श है, न केवल दंत ऊतक उत्थान में, बल्कि चेहरे की कायाकल्प के लिए चेहरे के सौंदर्यशास्त्र और बोटोक्स का उपयोग भी करता है। इस कार्यशाला से प्रतिभागियों को पीआरएफ तैयारी के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में और ज्यादा मदद की है।

कार्यशाला के अंत में डीन डॉ. एम. सिद्धार्थ ने मुख्य अतिथि और तीनो विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और धन्यवाद ज्ञापन किया ।

यह भी देखे:-

RYAN EXCEL IN 4TH REPUBLIC INTER SCHOOL BADMINTON CHAMPIONSHIP 2017
एचआईएमटी संस्थान का 18वां स्थापना दिवस कल, होनहार विद्यार्थी होंगे सम्मानित
हैकथॉन श्रृंखला आयोजित करेगा गलगोटिया यूनिवर्सिटी : ध्रुव गलगोटिया
शिक्षक देश का भविष्य गढ़ते हैं - डॉ.गुरिंदर सिंह ग्रुप वाईस चांसलर एमिटी , "डैडी" का प्रोमोशन करने ए...
शारदा विश्वविद्यालय: "नर्सिंग एंड रिसर्च में व्यापक विकास" पर कार्यक्रम आयोजित
जीएनआइओटी एमबीए इंस्टिट्यूट मे फ्रेशर पार्टी , पुनीत मिस्टर फ्रेशर तो वर्णिता बनी मिस फ्रेशर
रेडियोलोजी का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान : पी के गुप्ता , चांसलर शारदा विश्वविधालय
जी.एल. बजाज में इन्टरप्रिन्योरशिप, इन्यूवेशन एण्ड इनोवेशन विषय पर फैकल्टी डेवलोपमेंट प्रोग्राम की शु...
सावित्री बाई स्कूल ने मनाया सावित्री बाई फूले का जन्मदिवस
मंगलमय संस्थान के वार्षिक महोत्सव ज़ील-2018 के शुभारम्भ
Ryanites all set to Go Green
शारदा विश्विद्यालय मेडिकल साइंसेज में विश्व क्षय रोग दिवस मनाया गया
युनाईटेड कालेज में कैम्पस प्लेसमेन्ट आयोजित, वीवो कम्पनी में छात्र हुए चयनित
Earth Day: सेंट जॉसेफ के बच्चों ने निकाली पर्यावरण जागरूकता रैली
नन्दनवन तीर्थ भरतनाट्यम प्रशिक्षण संस्थान ने वार्षिकोत्सव "नन्दनोत्सव" मनाया
के.आर .मंगलम वर्ल्ड स्कूल में ‘एनचांट-2018 इंटर स्कूल प्रतियोगिता का आयोजन