शारदा विश्विद्यालय में ‘पाठ्यक्रम कार्यान्वयन सहायता कार्यक्रम” की कार्यशाला का आयोजन

ग्रेटर नोएडा : मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देश पर शारदा विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च के चिकित्सा शिक्षा इकाई ने मेडिकल शिक्षा विनियमन 2019 के तहत १४ नवंबर से १६ नवंबर तीन दिवसीय ”पाठ्यक्रम कार्यान्वयन सहायता कार्यक्रम” की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शारदा विश्वविधालय के प्रो. वाईस चांसलर डॉ. पी. एल. कोरिहोलू और मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीषा जिंदल तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ अशोक भटनागर के साथ अन्य चिकित्सा संकायों के वरिष्ठ चिकित्सक और संबद्ध विषयों के तीस प्रतिभागियों भी उपस्थित थे। इस कार्यशाला का निरीक्षण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रेक्षक और मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज की डॉ. पूनम लुम्बा ने किया।

डॉ. पूनम लुम्बा का स्वागत शारदा शारदा विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की डीन डॉ. मनीषा जिंदल ने किया और कहा की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ाने और 21 वीं सदी के लिए स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए संकाय विकास के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

कार्यशाला के समन्वयक और चिकित्सा शिक्षा इकाई के अध्यक्ष डॉ. अशोक भटनागर ने अपने सम्बोधन में कहा की संशोधित पाठ्यक्रम में उन दक्षताओं को शामिल करने का प्रयास किया गया है जो छात्र को होनी चाहिए । मूल्यांकन के तरीके प्रभावी ढंग से और सहानुभूति के साथ संवाद करना रोगियों और उनके रिश्तेदारों को संशोधित क्षेत्र के एक मुख्य अंग है । इस पाठ्यक्रम में विकास और शिक्षण को एक अनिवार्य और वांछनीय कौशल की व्यापक सूची की योजना बनाई गई है और भारतीय चिकित्सा स्नातक के लाइसेंस से पहले कौशल का प्रमाणन आवश्यक होगा।
शारदा विश्विद्यालय के आंतरिक चिकित्सा विभाग के डॉ. पंकज बंसल, जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. विक्रम सिंह, एनॉटोमी विभाग की डॉ. सामंता इत्यादि ने एजुकेशन ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन में प्रस्तावित बदलाव पर सत्र के दौरान प्रशिक्षण के तरीकों, एकीकरण, मूल्यांकन और नए तरीकों से अवगत कराया।

शारदा विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च के प्रो. वाईस चांसलर डॉ. पी. एल. कोरिहोलू ने कहा की कार्यशाला में समूह की बहुत सारी गतिविधियाँ, व्यक्तिगत कार्य, भूमिकाएँ, छोटे समूह चर्चाएँ आदि शामिल थीं। समूह गतिविधियों की योजना इस प्रकार बनाई गई थी कि लक्ष्यों को सक्षमता आधारित शिक्षा के साथ-साथ विशिष्ट शिक्षण उद्देश्यों, शिक्षण-शिक्षणविधियों और मूल्यांकन के साथ जोड़ा जाए।
इस कार्यशाला की निरीक्षक डॉ. पूनम लुम्बा ने कहा की प्रतिभागियों द्वारा आवंटित बिंदु को प्रत्येक सत्र के बाद ज्ञान और महत्व में महत्वपूर्ण सुधार दिखा। कार्यशाला की समग्र व्यवस्था और आचरण से प्रतिभागी बेहद संतुष्ट है।

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