श्री राम मित्रमण्डल रामलीला : जानकी विदाई का मार्मिक मंचन किया गया

नोएडा : श्री राम मित्रमण्डल नोएडा सेक्टर-62 द्वारा आयोजित रामलीला मंचन के छठवें दिन मुख्य अतिथि नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एम. पी. सिंह एवं कुमार संजय विशेष कार्याधिकारी नोएडा प्राधिकरण ने दीप प्रज्जवलन कर रामलीला का शुभारंभ किया । सर्वप्रथम बारिश के व्यवधान के कारण पंचम दिवस के मंचन को पूर्ण किया गया.

रामलीला स्थल पर बारात का जनक का किरदार निभा रहे श्रीराम मित्र मंडल नोएडा के महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा एवं कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया । तत्पश्चात चार मंडपों में श्रीराम जानकी सहित चारों भाइयों का विधि विधान से विवाह संपन्न होता है। विवाह के पश्चात राजा जनक से अयोध्या नगरी वापस जाने की आज्ञा माँगने पर राजा जनक की आखों से अश्रु छलक पड़ते हैं । जानकी विदाई का मार्मिक मंचन किया गया जिसमे जानकी विदाई के समय राजा जनक की हृद यवय्था का मार्मिक मंचन किया गया । राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ जी से कहते हैं कि मेरी एक अभिलाषा हैं कि राम को युवराज पद दे दिया जाये यह सुनकर मुनि वशिष्ठ अति प्रसन्न हुए। उधर देवता सोचते हैं कि अगर राम को वनवास नहीं होता हैं तो निशाचरों का नाश कैसे होगा इसके लिए उन्होंने सरस्वती जी से प्रार्थना की और सरस्वती कैकेयी की दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं। मंथरा कैकेयी को समझाती हैं कि इस राजतिलक में सिर्फ राम का भला है ।

कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं और जब राजा दशरथ कैकेयी से कोप भवन में जाने का कारण पूछते हैं तो वह राजा को पहले दिये गये उनके वचन को याद दिलाती है कि समय आने पर दो वरदान मांग लेना, मैं पहला वरदान भरत को राज व दूसरा रामको 14 वर्ष का वनवास मांगती हूँ । राजा के समझाने के बावजूद कैकेयी नहीं मानती तो यह सुनकर दशरथ हेराम हेराम कहते हुए मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। भगवान राम को यह पता लगता है तो वह 14 वर्ष के वनवास के लिए तैयार हो जाते हैं । सभी नगरवासी विलाप करते हुए राम को रोकने का प्रयास करते हैं और राजा दशरथ राम के वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। भगवान राम गंगा तट पर पहुंचकर केवट से नाव मांगते हैं । लेकिन केवट नाव नहीं लाता है और कहता है कि प्रभु में आपके मर्म को जानता हूँ जिस तरह आपके चरण रज का स्पर्श पाते ही पत्थर की शिला सुन्दर नारी बन गई अगर मेरी नाव भी स्त्री बन गई तो मेरी रोजी रोटी चली जायेगी । मैं आपको गंगा के पार उतार देता हूँ,प्रभु मुझे भवसागर के पार उतार देना । भगवान राम को सीता व लक्ष्मण सहित गंगा के पार उतार देता है।

भरत माता कैकई को सफेद वस्त्रों में देखर भौंचक्के रह जाते हैं वह इसका कारण कैकई से पूछते हैं। कैकई पूरा वृतांत सुनाती है और कहती मेने राजा दशरथ द्वारा दिये गए अपने वरदानो के आधार पर राम के लिये 14 वर्षों का वनवास ओर तुम्हारे लिये राज मांगा है। यह सुनकर भरत माता कैकई को अपनी माता कहने के सुख से वंचित करते हुए कहते हैं कि आज के पश्चात आप मेरी माता नही हो आपने माता कहने का अधिकार खो दिया है। मेरे पिता की हत्या ओर मेरे भाई राम को वनवास भेजने वाली मेरी माता कैसे हो सकती है।वह ईश्वर को साक्षी मानकर यह सौगंध लेते हैं ओर राम,लक्ष्मण और सीता को ढूंढने निकल पड़ते हैं। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण व निषादराज के साथ प्रयागराज में भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचते हैं वहां ठहरने के पश्चात मुनि से विदा लेकर चित्रकुट में वाल्मीकि जी के आश्रम में पहुंचते हैं जहां पर भरत, सुमंत्र, शत्रुध्न व मां कैकई के साथ राम को मनाने पहुंचते हैं लेकिन राम पिता की आज्ञा के कारण वन से अयोध्या वापस नहीं जाते तब भरत उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या वापस आ जाते हैं । अगले दृश्य में भगवान श्रीराम भ्राता लक्ष्मण व सीता के साथ पंचवटी में पहुंचते हैं जहां पर वह पर्ण कुटी बनाकर रहने लगते हैं। वहां पर रावण की बहन सूर्पणखा आती है ।

वह कामातुर होकर राम व लक्ष्मण से विवाह के लिए कहती हैं उनके मना करने पर वह भयंकर रूप धारण कर लेती है । क्रोध में लक्ष्मण जी उसके नाक कान काट लेते हैं यह सब सुनकर खर, दूषण, त्रिसरा आये और उन्हों ने राम व लक्ष्मण के साथ भयंकर युद्ध किया । जिसमें भगवान श्रीराम ने उन तीनों को मारकर अपने परम धाम पहुंचा दिया ।इसी के साथ दिन की लीला का समापन होता है । श्रीराम मित्र मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चौ. रविन्द्र सिंह ने बताया 05 अक्टूबर को सीता हरण, सीता की खोज, सुग्रीव मित्रता, बाली वध, अशोक वाटिका विध्वंस आदि प्रसंगों का मंचन किया जायेगा । इस अवसर संस्थापक अध्यक्ष बी0पी0 अग्रवाल, मुख्य यजमान उमाशंकरगर्ग, उप मुख्यसंरक्षक ओमबीर शर्मा ओंकारनाथ अग्रवाल, अध्यक्ष धर्मपाल गोयल, महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग, सह – कोषाध्यक्ष अनिल गोयल, सतनरायण गोयल, तरुण राज, मनोज शर्मा, मुकेश गोयल, मुकेश गुप्ता, संजय शर्मा, रविन्द्र चौधरी, आत्माराम अग्रवाल, मीडिया प्रभारी चंद्रप्रकाश गौड़, मुकेश गर्ग, एस एम गुप्ता, गिरिराज बहेड़िया, पवन गोयल,मुकेश अग्रवाल, सुधीर पोरवाल, राकेश गुप्ता,अजय गुप्ता, रामनिवास बंसल, ओपी गोयल,कुलदीप गुप्ता, चंद्रप्रकाश गौड़,सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

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