UNCCD COP14:भूमि क्षरण को रोकने के लिए 14 अफ्रीकी देशों ने अपनाया 3S का फार्मूला

ग्रेटर नोएडा(रोहित कुमार):14 अफ्रीकी देशों ने स्थिरता,सुरक्षा,निरंतरता के सिद्धांत को अपनाया है.अफ्रीकी देशों में मरुस्थल वाली क्षेत्रफल काफी अधिक है. मरुस्थल वाली क्षेत्रफल अधिक होने के कारण कृषि युक्त संसाधन काफी कम है.जिसके वजह से आसपास रह रहे लोगों को रोजगार तलाशने के लिए दूसरे मुल्क में जाना पड़ता है,साथ ही निरंतर भूमि क्षरण की समस्या भी बनी हुई है.जिसके वजह से मरुस्थल वाली क्षेत्रफल की संख्या में इजाफा हो रही है.इसे ध्यान में रखते हुए अफ्रीकी देशों के एक समूह ने यह शुरुआत किया कि सभी देशों के शासन व्यवस्था में आसीन लोगों की सकारात्मक सोच पर्यावरण के प्रति हो तब उचित तरीके से इस समस्या से लड़ने के लिए कार्य किया जा सकता है. इस मौके पर प्रेस को संबोधित कर रहे मरियम त्रोरे चज़नल(आईओएम प्रवास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन नीति अधिकारी) ने बताया कि आज मरुस्थलीकरण एक वैश्विक समस्या है साथ ही बहुत से मुल्क ऐसे हैं जहां भूमि क्षरण प्रतिवर्ष बढ़ रही है.इसे देखते हुए हमने 3S के फार्मूले को अपनाया है,और हमारा मानना यह है कि यदि राजनीतिक पार्टियां पर्यावरण के प्रति रुचि रखती है तो बहुत से बेहतर संभावना हो सकते हैं साथी ग्रीन जॉब्स पर भी विस्तृत चर्चा हुई ग्रीन जॉब्स के अंदर कई विभिन्न संस्थाएं कार्य कर सकती है.मुख्य रूप से ग्रीन जॉब्स के अंदर क्या संभावना होगी इसके ऊपर प्रकाश डालते हुए प्रेस को संबोधित कर रहे वक्ता मोहम्मद दुबी कदमीर(मोरक्को की सरकार के राजनयिक सलाहकार, शेरपा 3 एस) ने बताया कि ग्रीन जॉब्स की सबसे अधिक संभावना कृषि क्षेत्र में है साथी पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह काफी बेहतर है.अगर इन दो चित्रों को सुचारू रूप से चलाया जाए तो जो क्षेत्रीय आबादी दूसरे शहर या दूसरे मुल्क रोजगार की तलाश करने के लिए जाते हैं उनको ऐसा नहीं करना पड़ेगा. साथ ही नाइजर के जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रपति के सलाहकार श्री इस्फी बोउरीमा (शेरपा 3 एस) उन्होंने बातचीत के क्रम में बताया कि 3S फार्मूले को अगर अधिक से अधिक देश अपनाते हैं,तो हम इस वैश्विक समस्या से काफी तेजी से उभर सकते हैं.
जब ग्रेनोन्यूज संवाददाता ने सवाल पूछा कि
यदि कोई देश 3S फार्मूले का पालन नहीं करती है तो उस स्थिति में यूनाइटेड नेशन का समूह क्या एक्शन उस देश के प्रति लेगी ?
जवाब में उन्होंने बताया कि यूनाइटेड नेशन समूह की नियमित बैठक होती है जिसमें हर क्षेत्र की जानकारी साझा की जाती है जानकारी साझा होने के पश्चात एक विशेष समूह गहन चिंतन करती है.उसके बाद यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो हम उस विशेष मुल्क के साथ बातचीत करते हैं और जो बेहतर समाधान निकल सकता है वह किया जाता है.उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में चल रहे 12 दिवसीय कार्यक्रम में 9 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचेंगे और उस दिन दिल्ली डिक्लेरेशन कि अहम् मुद्दे भी निकल कर सामने आएगी.

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