50 साल पुरानी जोड़ों की समस्या से मिला नया जीवन, 90 की उम्र में मिला जोड़ों की समस्या से छुटकारा

· 50 से अधिक उम्र के लगभग 49.2 प्रतिशत लोग हड्डी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं

· बढ़ती उम्र बीमारी का एक बड़ा कारण

· 90 साल के मरीज को खुलकर जीने का मौका मिला

ग्रेटर नोएडा: उत्तर भारत में अग्रणी स्वास्थ्य प्रदाताओं में से एक मैक्स हेल्थकेयर ने ग्रेटर नोएडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य लोगों को हड्डी और जोड़ों की समस्याओं से अवगत कराना था। चाहे शहर हो या गांव आज कल हड्डी और जोड़ों की बीमारियों की समस्या हर जगह आम हो गई है। बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या खुद ब खुद विकसित होने लगती है। 50 से अधिक उम्र के लगभग 49.2 प्रतिशत लोग हड्डी की बीमारियों, जैसे हड्डी के विकार, ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोपेनिया, पुराना ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि से पीड़ित हैं।

डब्ल्यएचओ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 65 से अधिक उम्र की 45 प्रतिशत महिलाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस घुटने के लक्षण नजर आते हैं। लोग अक्सर इन समस्याओं को बढ़ती उम्र का हिस्सा समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिसके कारण समय के साथ वे पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। मरीजों की समस्या को खत्म करने के लिए सही समय पर निदान और उपचार जरूरी हैं।

सर्जरी के डर से ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। हालांकि, इस तरह की लापरवाही से स्थिति और बिगड़ती है और गंभीर समस्याओं का कारण बनती है। 90 साल के हरभजन सिंह (मरीज) के दाएं घुटने में समस्या थी, जिसके कारण उन्हें 30 सालों से चलने फिरने में तकलीफ थी। बुजुर्ग होने के कारण कई बार उनके इलाज के लिए मना कर दिया गया, जिससे वह पूरी तरह से निराश हो चुके थे। इस मामले में सर्जरी के दौरान मरीज को हार्ट अटैक या ब्लड क्लॉट होने के जोखिम की संभावनाएं बहुत ज्यादा थीं, जिसके कारण डॉक्टर कोई फैसला नहीं ले पा रहे थे।

मैक्स हेल्थकेयर के सलाहकार डॉ.निकुंज अग्रवाल ने बताया कि, “यह मामला हमारे लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि बुढ़ापे में हड्डियां बहुत कमजोर होती हैं, जिससे सर्जरी के दौरान फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है। जांच से पता चला कि मरीज को पल्स की हाई रेट के साथ एनिमिया था और वह बहुत कमजोर भी था। इस सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करना बहुत मुश्किल था। सर्जरी में लगभग एक घंटा लगा और अब मरीज बिल्कुल स्वस्थ है।”

हरभजन सिंह ने अपनी समस्या के बारे में बात करते हुए कहा कि, “शुरुआत में सर्जरी कराने से मैं डर रहा था। हालांकि, मैं वाकई में पूरी तरह से ठीक होकर और आत्मनिर्भर होना चाहता था, जो सिर्फ सर्जरी से ही संभव था। 30 सालों के दर्द के बाद मैने सर्जरी कराने का फैसला लिया। डॉ अग्रवाल और उनकी टीम ने मुझे बहुत सपोर्ट किया, जिसके कारण ही आज मैं फिर से पहले की तरह चल पा रहा हूं। मैं सभी का आभारी हूँ।”
67 साल की श्रीमती दविंदर कौर का मामला भी समान था। जोड़ों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस की 10 सालों की समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने दोनों घुटनों में टोटल नी रिप्लेसमेंट करवाया। आज वे सुखी जीवन व्यतीत कर रही हैं।

श्रीमती दविंदर कौर ने बताया कि, “जागरुकता की कमी और लापरवाही के कारण ही मेरी हालत बद से बद्तर होती जा रही थी। मुझे सर्जरी को लेकर कुछ संदेह था, जिसके कारण मैं उससे दूर भाग रही थी। हालांकि, मैंने अपनी समस्या को गंभीरता से लिया होता तो इस दर्द को मुझे इतने सालों तक सहना नहीं पड़ता।”

डॉ. निकुंज अग्रवाल ने आगे बताया कि, “हम अक्सर ऐसे लोगों से मिलते हैं जो ऑस्टियोआर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों से संबंधित अन्य समस्याओं से ग्रस्त होते हैं। अधिकांश मामलों में लापरवाही एक मुख्य कारण होती है। लोग सर्जरी से बचने के लिए दर्द को नजरअंदाज करते रहते हैं, जिससे समस्या और गंभीर होती जाती है। इन समस्याओं की संख्या अब शहरों में अधिक हो गई है इसलिए हल्की सी परेशानी में भी डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।”

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