अयोध्या मामला: क्या जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति हो सकता है? – न्यायालय

नई दिल्ली: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। राम लला के वकीलों ने अपनी दलीलें जारी रखीं। राम लला विराजमान के वरिष्ठ वकील के परासरन ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि ‘जन्मस्थान’ की सटीक जगह नहीं है, लेकिन इसका मतलब आसपास के क्षेत्रों से भी हो सकता है। पूरा क्षेत्र जन्मस्थान है। इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है कि यह जन्मस्थान भगवान राम का है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष इस विवादित क्षेत्र को जनम स्थान कहते हैं।
न्यायालय ने वरिष्ठ वकील से पूछा कि क्या जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति हो सकता है? मूर्ति एक न्यायिक व्यक्ति हो सकता है लेकिन क्या एक स्थान या जन्मस्थान न्यायिक व्यक्ति हो सकता है? इसके जवाब में के परासरन ने कहा, ‘मूर्ति का वहां मौजूद होना कानूनी व्यक्ति के निर्धारण के लिए एकमात्र परीक्षण नहीं है।’

वहीं, अब इस मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई होगी। इस तरह अयोध्या मामले में पांच दिन सुनवाई होगी। आमतौर पर संवैधानिक बैंच तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही किसी मामले पर सुनवाई करती है। इस मामले में सुनवाई 6 अगस्त से शुरू हुई थी और आज सुनवाई का तीसरा दिन रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि अयोध्या मामले में तीन दिन सुनवाई होगी, मगर आज इसे पांच दिन कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के मुताबिक, अब अयोध्या मामले की सुनवाई पांचों कार्यदिवसों यानी सोमवार से शुक्रवार चलेगी। आज सुनवाई का तीसरा दिन था, जिसमें हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं।

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