धारा 370 हटाने के बाद उम्मीद की किरण बने अमित शाह

स्तंभकार(दीपक कुमार त्यागी):देश के सामने खड़े बहुत सारे ज्वंलत मुद्दों के स्थाई समाधान के लिए जिस तरह से बहुत आशा व उम्मीद के साथ भारत की जनता ने 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी के नेतृत्व में भरोसा जताकर, भाजपा को 303 सीटों पर विजयी बनाकर केंद्र में सरकार बनाने के लिए प्रचंड बहुमत दिया था. उसके बाद जिस तरह से मोदी-शाह की जोड़ी ने बेहद गोपनीय ढंग से 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से धारा 370 के खंड 1 को छोड़कर बाकी सभी खंडों को हटाने का कार्य व जम्मू कश्मीर राज्य के दो टुकड़े करके राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिया है. उसको देखकर लगता है कि अबकी बार मोदी-शाह की जोड़ी देश में लम्बे समय से चली आ रही ज्वंलत समस्याओं का स्थाई समाधान करने के लिए दृढतापूर्वक लग गयी हैं. मोदी सरकार को जिस तरह से लोकसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ जनता का प्यार हासिल हुआ था उसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को ही जाता हैं. जिस तरह से जम्मू कश्मीर के बेहद ज्वंलत मसले पर जिस गोपनीय ढंग से कुशल, कारगर रणनीति देश के गृहमंत्री अमित शाह ने बनाई है, उनकी इस कार्यशैली के चलते राजनैतिक लोगों के साथ-साथ अब आम जनता के बीच भी उनको “चाणक्य” की उपाधि से नवाजा जाने लगा है. देश के राजनैतिक गलियारों में अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, बहुत मेहनती और असंभव को संभव बनाने की पहचान रखने वाले अमित शाह ने जिस तरह से 05 अगस्त 2019 को देश की संसद को अवगत कराया कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाकर राज्य का पुनर्गठन किया जा रहा है. उस घोषणा के बाद से आम व खास सभी लोग अमित शाह की तुलना भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल से करने लगे हैं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनते समय अमित शाह ने जिस तरह से मोदी सरकार में केबिनेट मंत्री के रूप में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ ली थी तब से राजनैतिक गलियारों में अटकलों का बाजार बहुत गर्म था कि भाजपा के राजनैतिक चाणक्य की देश के मंत्रीमंडल में क्या भूमिका रहेगी. सभी की नजरें इस बात पर थी कि अमित शाह को सरकार में क्या जिम्मेदारी मिलेगी उनकी सरकार में क्या हैसियत होगी इस पर लोगों ने शपथ लेने के तुरंत बाद ही तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिये थे. हालांकि शुरुआत में उन्हें वित्त मंत्रालय का प्रभार सौंपे जाने की चर्चा बहुत जोरशोर से थी. लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 मई 2019 को विभागों का बट़वारा करके अमित शाह को देश के गृहमंत्री का जिम्मा दिया था, उससे उनकी कार्यशैली को जानने वाले लोगों के मन में तब ही स्पष्ट हो गया है कि वो केंद्र सरकार में नम्बर-2 कि हैसियत के साथ सबसे ताकतवर मंत्री के रूप में देश में व्याप्त ज्वंलत समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए अबकी बार कुछ ना कुछ ठोस काम जरूर करेंगे और वो मोदी सरकार के द्वारा देश की जनता किये चुनावी वायदों व देशहित के महत्वपूर्ण उद्देश्यों को हर हाल में पूर्ण करेंगे.

वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी केबिनेट के सबसे ताकतवर मंत्री अमित शाह के सामने गृहमंत्री के रूप में बहुत सारी चुनौतियां होंगी जिनका उनको अपनी छवि के अनुसार स्थाई समाधान करना होगा. लेकिन जिस कुशल रणनीति के साथ शाह ने धारा 370 व जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिया है वो काबिलेतारीफ है. इस निर्णय के बाद आज देश में उनके धुरविरोधी भी उनकी कारगर रणनीति के कायल हो गये है. अब देश के आमजनमानस के साथ-साथ अन्य राजनैतिक दलों के लोग भी मानने लगे हैं कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद शाह अब देश में व्याप्त अन्य समस्याओं का भी स्थाई समाधान कारगर ढंग से जल्द ही करेंगे. कुछ समय पहले तक देश में भाजपा के चाणक्य व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खासमखास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मशहूर अमित शाह जब से देश के गृहमंत्री बने थे तो उस समय ही देश के बुद्धिजीवियों ने सरकार में उनके रोल को लेकर मंथन करना शुरू कर दिया था. देश में राजनीति की समझ रखने वाले लोगों ने उस समय ही आकलन करना शुरू कर दिया था कि इस बार नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में गृहमंत्रालय की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगी. देश के बुद्विजीवी लोगों ने तब ही कहना शुरू कर दिया था कि मोदी-शाह की जोड़ी की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है कि इस बार केंद्र सरकार देश के बहुत सारे विवादास्पद मसलों का स्थाई समाधान करने के लिए तैयार है. इसी उद्देश्य से मोदी ने अमित शाह को संगठन से लाकर केंद्र सरकार में गृहमंत्री बनाकर नम्बर-2 की हैसियत प्रदान की है. उसी के साथ 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने अमित शाह के नेतृत्व में जिस तरह से जम्मू कश्मीर समस्या के समाधान के लिए स्थाई पहल की है उसके बाद देशवासियों को मोदी-शाह की जोड़ी से बहुत ज्यादा उम्मीदें है. क्योंकि मोदी-शाह ने जिस तरह से अपने चुनाव प्रचार के दौरान देश के बहुत सारे ज्वंलत मसलों को लेकर जो बाते जनता से कहीं थी अब उन पर आने वाले समय में प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह का क्या रूख रहेगा. धारा 370 हटाने के बाद जहां एक तरफ अमित शाह के ऊपर जम्मू कश्मीर राज्य में शांति बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती होगी वहीं दूसरी तरफ देश की आतंरिक सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी उनके कंधे पर होगी. साथ ही साथ देश के अलग-अलग भागों में जो अलग-अलग तरह की ज्वंलत समस्याएं हैं उनसे मोदी-शाह की जोड़ी को अब अपनी शैली के अनुसार ठोस कारगर रणनीति बना कर स्थाई रूप से निपटना होगा. गृहमंत्री अमित शाह के सामने पूर्वोत्तर के राज्यों में अवैध घुसपैठ रोकने, जम्मू कश्मीर में अंदरूनी हालातों पर नियंत्रण व पाक परस्त आतंकवाद को रोकने की चुनौती होगी. वहीं शाह के सामने देश के दक्षिण भारत के कुछ प्रदेशों में आतंकवादी गुटों के प्रचार-प्रसार पर काबू पाने की बड़ी चुनौती होगी. अब देश की जनता देखना चाहती है कि एनआरसी और देश में व्याप्त नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से मोदी-शाह की जोड़ी कैसे स्थाई रूप से निपटती है. सभी देशवासियों की नजरें इस पर रहेंगी कि धारा 370 व जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद देश में गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का अगला कदम क्या होगा. आज देश की जनता गृहमंत्री अमित शाह से बहुत सारी समस्याओं का स्थाई समाधान चाहती जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं.

धारा-370 हटने एवं जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन के बाद जेएंडके में हालात सामान्य रखना
गृहमंत्री अमित शाह ने जिस तरह से 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा-370 के खंड 1 को छोडकर हटाया है व राज्य के दो टुकड़े करके उसका पुनर्गठन किया है उसके बाद जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था ठीक रखने को लेकर गृहमंत्री अमित शाह का रुख देखने लायक होगा कि वो किस तरह से राज्य व देश में कानून व्यवस्था सामान्य रख पाते हैं.

देश में बढ़ते भीड़तंत्र पर जल्द से जल्द लगाम लगाना
देश में जिस तरह से आयेदिन लोग अपने हाथ में कानून लेकर सड़क पर ही खुद निर्णय करने लग जाते उसको रोकना राज्य सरकारों के साथ-साथ आज केंद्र सरकार के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती है. क्योंकि देश में बढ़ते भीड़तंत्र के चलते अब विदेशी मुद्रा निवेश दिन-प्रतिदिन घट रहा है जिसके चलते मोदी सरकार का 5 ट्रिलियन इकनॉमी का सपना अधूरा रह सकता है. इसलिए गृहमंत्री अमित शाह को तत्काल राज्यों से सामंजस्य करके इस ज्वंलत समस्या का अपनी शैली के अनुसार सख्ती से समाधान करना होगा. तब ही देश तरक्की के नये आयाम स्थापित कर 5 ट्रिलियन इकनॉमी के क्लब में शामिल हो सकता है. लोग इस मसले पर उनका रुख देखना चाहते हैं.

एनआरसी का मसला
शाह के सामने गृहमंत्री के रूप में देश में बड़ी चुनौती “नेशनल रिजस्टर ऑफ सिटिजनशिप” (एनआरसी) को लागू करवाने में आ सकती है. क्योंकि असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में इसका जमकर विरोध हो रहा हैं. वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी का विरोध करने में सबसे ज्यादा मुखर रही हैं. इस मसले पर अमित शाह यदि आगे बढ़ते हैं तो ममता सरकार के साथ उनका टकराव और बढ़ सकता है. हालांकि अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान कहते थे कि एनआरसी को वो सख्ती से पूरे देश में लागू करेंगे और देश में अवैध रूप से निवास कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकाल बाहर करेंगे अब देखते है वो इस चुनौती का सामना कैसे करते है. वो समस्या का क्या स्थाई समाधान निकालते हैं और देश में आयेदिन होने वाली घुसपैठ पर लगाम लगा पाते है या नहीं.

देश से नक्सलवाद को खत्म करना
धारा 370 के बाद अमित शाह के सामने गृहमंत्री के रूप में एक बहुत बड़ी चुनौती होगी देश में नक्सलवाद की समस्या का स्थाई हल करना. क्योंकि आज देश के छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्य नक्सल समस्या से गम्भीर रूप से ग्रसित हैं. देश के विकास के लिए नक्सल समस्या बार-बार नासूर बनती है. इसे दूर करने के लिए शाह को अपनी छवि के अनुसार गंभीर कारगर प्रयास करने होंगे. जिससे कि इस समस्या का कोई स्थाई समाधान हो सकें और देश के अन्दरूनी हिस्सों में अमनचैन कायम हो सकें.

देश को आतंकवाद मुक्त करना
मोदी व शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह देश की जनता को बार-बार आश्वस्त किया था कि आतंकवाद के खिलाफ उनकी व उनकी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति हमेशा रहेगी. उसके चलते देशवासियों को गृहमंत्री के रूप में शाह से बहुत ज्यादा उम्मीदें है. धारा 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में जारी आतंकवाद पर काबू पाना अमित शाह की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगा. वैसे भी अमित शाह आतंक और आतंकवाद के प्रति कड़ा रुख रखने के लिए जाने जाते हैं. अभी कुछ माह पूर्व जिस तरह से आतंकवादी घटनाओं के तार दक्षिण भारत के केरल एवं तमिलनाडु से जुड़ते दिखे हैं. अमित शाह के सामने इस नई मुसीबत से भी निपटने की चुनौती होगी. साथ ही शाह से देश को आतंकवाद से मुक्त करने की जनता को बहुत उम्मीदें हैं.

नार्थईस्ट की समस्या का समाधान
एक ध्वज एक निशाना एक संविधान के नारे के साथ, वर्षों से चली आ रही नार्थईस्ट के राज्यों की समस्या पर गृहमंत्री अमित शाह का रुख देश की जनता देखना चाहती है.

धार्मिक कट्टरपंथियों से निपटने की चुनौती
अमित शाह के सामने गृहमंत्री के रूप में आज सबसे बड़ी चुनौती है कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए व देशवासियों को अमनचैन युक्त शांतिपूर्ण माहौल देने के लिए देश के अंदर आयेदिन पनप रहे धार्मिक कट्टरपंथियों के साथ बहुत ही सख्ती के साथ निपटने की है. जिसे कि देश में अमनचैन कायम हो सकें और लोग प्यार मोहब्बत के साथ एकजुट होकर रह सकें.

वैसे तो धारा 370 के घटनाक्रम के बाद देशवासियों को गृहमंत्री अमित शाह से बहुत ज्यादा उम्मीदें है. लेकिन यह तो आने वाला समय ही तय करेगा की वो जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने की तरह ही राजनीति में सफलता के नये आयाम स्थापित करके देश के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे या नहीं.

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