शोध को बढ़ावा देने के लिए छः दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन

ग्रेटर नॉएडा| ग्रेटर नॉएडा के शारदा विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में 27 मई से 1 जून फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। 6 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में जनसंचार विभाग के शिक्षको में शोध और अनुसंधान की समझ विकसित करने के लिए रखा गया था। इस कार्यक्रम की शुरुवात डॉ तर्जीत सभरवाल ने अपने उदबोधन से की। शोध के बारे में समझाते हुए कहा की शोध उस प्रक्रिया अथवा कार्य का नाम है जिसमें बोधपूर्वक प्रयत्न से तथ्यों का संकलन कर सूक्ष्मग्राही एवं विवेचक बुद्धि से उसका अवलोकन-विश्‌लेषण करके नए तथ्यों या सिद्धांतों का उद्‌घाटन किया जाता है।कार्यक्रम में आई आई एआईएम सी ,जामिया और दिल्ली विश्व विद्यालय के कई प्रबुद्ध शोधकर्ता और प्रोफ़ेसर ने हिस्सा लिया और शोध के गूढ़ रहस्यों के बारे में जानकारी दी।

डॉ अनुभूति यादव ने शोध लेखन की प्रक्रिया और विषय के चुनाव की विधि पर प्रकाश डाला, और कहा की शोध ज्ञान के विविध पक्षों में गहनता और सूक्ष्मता लाता है और न्यू मीडिया रिसर्च पर ज्यादा जोर दिया | प्रोफेसर साइमा सईद और प्रोफेसर सुनेत्रा नारायण ने दोनों ने शोध पर अपनी-अपनी राय दी और रिपोर्ट लेखन की नई विधि की जानकारी दी। तथा तालिका निर्माण, डाटा के निर्धारण और समूह में कार्य करने की जरूरतों पर चर्चा की। और कहा की शोध अनेक नवीन कार्यविधियों व उत्पादों को विकसित करता है शोध ज्ञान के विविध पक्षों में गहनता और सूक्ष्मता लाता है। तथा “शोधपत्र विषय” पर ज्यादा जोर डालते हुए कहा की यह एक शैक्षणिक प्रकाशन विधि है इसमें किसी शोध-पत्रिका में लेख प्रकाशित किया जाता है|

डॉ कुलवीं त्रेहन ने मात्रात्मक तरीकों से शोध पर ज्यादा जोर दिया और कहा की मात्रात्मक विश्लेषण केवल चर के गणितीय मूल्यों की परीक्षा के माध्यम से चीजों को मापने या मूल्यांकन करने का एक तरीका है मात्रात्मक विश्लेषण का प्राथमिक लाभ यह है कि इसमें सटीक, निश्चित मूल्यों का अध्ययन करना शामिल है, जिन्हें आसानी से एक दूसरे के साथ तुलना की जा सकती है| शोध उपयोगिता पर प्रकाश डाला और शोध में आने वाली समस्या का किस तरह समाधान किया जा सकता हे उस पर चर्चा की और कहा की शोध, उत्पादक और समस्या का समाधान खोजने वाला होना चाहिए ताकि समाज और राष्ट्रहित के लिए उपयोगी हो। कार्यक्रम को आगे व सम्पूर्ण करने के लिए शोध का महत्व समझाने के लिए और भी विद्वान आए डॉ अनुभूति यादव (Hod new media,IIMC) प्रोफेसर साइमा सईद जो की “सेज पुब्ल” है| प्रोफेसर सुनेत्रा नारायण जो की “कम्युनिकेटर” है| डॉ कुलवीं त्रेहन आदि जैसे जाने माने विद्वानों ने शोध की विभिन्न प्रकार और विशेषताओं की जानकारी दी| कार्यक्रम के अंत में शारदा विश्वविद्यालय के डीन ऐकेडेमिक और जन संचार विभाग के एच ओ डी डाक्टर अमित चावला ने सभी का धन्यवाद दिया और कहा की ऐसे प्रोग्राम शिक्षकों के विकास के लिए काफी हितकर है।

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