विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस: पुरानी सोच बदलें और स्वस्थ रहें – डॉ. उपासना सिंह

ग्रेटर नोएडा : सामाजिक संस्था ह्यूमन टच फाऊंडेशन फाॅर वुमेन ने आज विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन साकी पुर गाँव की चौपाल पर किया ।इस कार्य क्रम के विषय में बताते हुए संस्था की अध्यक्षा डॉ उपासना सिंह ने कहा कि मासिक धर्म कोई अपराध नहीं, बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। जिस पर घर और समाज में खुलकर बात की जाए तो इस दौरान स्वच्छता के महत्व को भी समझा जा सकता है। जिसके लिए हमें एक माहौल बनाना होगा और पुरानी परंपरागत सोच को बदलना होगा। यह स्वच्छता महिलाओं को स्वस्थ और रखेगी।डॉ नाइमा ने महिलाओं को विस्तार से इस विषय पर जानकारी दी ।28 मई को पूरी दुनिया में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। 2014 में जर्मनी के वॉश यूनाइटेड नामक एक एनजीओ ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य है लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता रखने के लिए जागरूक करना था। तारीख 28 इसलिए चुनी गई, क्योंकि आमतौर पर महिलाओं के मासिक धर्म 28 दिनों के भीतर आते हैं।

कार्यक्रम के अंत में ज़ोया ने महिलाओं से उनकी इस विषय से संबंधित रोजाना की परेशानियों को साझा किया। पहले के जमाने में इस विषय पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता था और न ही महिलाओं को अपने शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया के बारे में समय से पहले बताया जाता था ।ऐसी स्थिति में उनके मानसिक रूप से तैयार होने और स्वच्छता बनाए रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उल्टा उस स्थिति में उनसे, यह मत करो, वह मत करो। मंदिर मत जाओ, अचार मत छुओ। एक जगह बैठो, ऐसा सब कहा जाता था हालांकि आज फिर भी इन बातों पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है ।गांव-देहात की महिलाएं आज भी मासिक धर्म को लेकर भ्रांति में जी रही हैं। उनमें न तो जागरूकता है और न ही उन्हें इससे होने वाली बीमारियों के बारे में पता है।

मासिक धर्म में स्वच्छता नहीं होने के कारण देश की महिलाओं की जान भी जा रही है। हम सर्वाइकल कैंसर में पहले नंबर पर हैं इसलिए मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता न रखने पर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। यह संक्रमण कभी-कभी यूट्रस तक भी पहुंच जाता है। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। इस कार्यक्रम का आयोजन गिरिकाॅन साॅल्यूशनस प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से किया गया । इस अवसर पर महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन बांटे गए और बताया गया कि मासिक धर्म के समय सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करें तथा इन्हें हर छह घंटे में बदलें। गीला रहने पर त्वचा में संक्रमण हो सकता है। इस्तेमाल किए गए पैड को सही तरीके से फेंकना भी बहुत जरूरी है, नहीं तो आसपास के वातावरण में भी बीमारियां फैल सकती हैं। गिरिकाॅन की प्रतिनिधि कल्पना ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा से ही समझ और जागरूकता आती है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, शर्मनाक नहीं।

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