गौतम बुद्धा विश्विद्यालय में दो दिवसीय स्टाफ डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन

ग्रेटर नोएडा : गौतम बुद्धा विश्विद्यालय में दो दिवसीय स्टाफ डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन 10 व 11 मई 2019 में किया गया । कार्यशाला के पहले दिन , गौतम बुद्धा विश्विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भगवती प्रकाश शर्मा स्टाफ डेवलपमेंट प्रोग्राम टीचिंग पेडागोगी के मुख्य वक्ता रहे। अपने उद्घाटन सम्भाषण में कुलपति ने वर्तमान समय में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में होने वाले परिवर्तनों की तार्किक व्याख्या प्रस्तुत की ।उन्होंने एक आदर्श शिक्षक हेतु अपरिहार्य योग्यताओं पर भी विस्तार से चर्चा की ।

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में संज्ञानात्मक दृष्टिकोण के विभिन्न पक्षों पर भी विभिन्न उपयुक्त उद्धरणों के माध्यम से प्रकाश डाला गया । कुलपति ने विभिन्न नवीन शिक्षण अधिगम तकनीकी जैसे -सहपाठी अधिगम , फिश बाउल तकनीक, सामूहिक चर्चा आदि पर प्रकाश डाला ।

अपने धन्यवाद ज्ञापन में कार्यशाला संयोजक डॉ. विनोद कुमार शनवाल ने समस्त उपस्थित अतिथिओं का आभार व्यक्त किया । विश्विद्यालय के कुलसचिव बच्चू सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे । प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. प्रमोद पालीवाल, पंडित दीन दयाल पेट्रोलियम विश्विद्यालय अहमदाबाद , प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा, आंबेडकर विश्विद्यालय,दिल्ली , प्रोफेसर श्वेता आनंद , डॉ. लवी सरिकवाल, प्रोफेसर रेनू गुप्ता, डॉ जे सी सिंह तथा डॉ. विनोद कुमार शनवाल रहे ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु प्रतिभागी बुलंदशहर ,आगरा, मथुरा, जेवर, मेरठ, गाज़ियाबाद,नॉएडा,दिल्ली, मऊ आदि स्थानों से सम्मलित हुए । यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु विश्विद्यालय में मात्र 35 सीटें निर्धारित की थी, परन्तु प्रतिभागियों के अत्यधिक रुझान को देखते हुए विश्विद्यालय ने सीटों की संख्या दोगुनी कर दी , इसके उपरांत भी प्रतिभागिओं का दवाब बढ़ता गया और यह सीमा 100 तक बढ़ाई गयी और अंततः यह सीमा 105 तक पहुंच गयी तथा बाकी लोगों को भी अगली कार्यशाला में सम्मलित किया जायेगा ।
कार्यशाला के पहले दिन , गौतम बुद्धा विश्वविद्यालयल में कार्यशाला की शुरुवात प्रायोजित ज्ञान से हुई, जिसमे डॉ. प्रमोद पालीवाल ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने हेतु विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किये ।प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा, आंबेडकर विश्विद्यालय, दिल्ली ने भी शिक्षण की प्रक्रिया में वर्तमान तकनिकी प्रयोगों एवं अधिगम प्रबंधन तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया ।वर्तमान समय की आवश्यकता है कि शिक्षक नित नवीन परिवर्तनों से स्वयं को अपडेट रखे इस सत्र में बेहतर एलेक्क्टरोनिक प्रस्तुतीकरण हेतु विभिन विकल्पों पर चर्चा की गयी। विभिन्न वेबसाइट एवं टूल्स से प्रतिभागिओं को अवगत कराया गया । संम्पूर्ण सेशन अत्यधिक इंटरैक्टिव रहा , जिसमे प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया , श्रोताओं द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नो का संतोषजनक उत्तर दिया गया ।

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रोफेसर रेनू गुप्ता ने अकादमिक इंटीग्रिटी आचार व्यवहार एवं नैतिकता पर अपनी प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी ।डॉ। रेनू ने उन कारणों का विश्लेषण किया जो अकादमिक गैरईमान्दारी हेतु जिम्मेदार हैं । सफलता हेतु महत्वाकांक्षा , अपने मित्र समूह में स्टेटस कम होने का भय,प्लागारिस्म के विषय में ज्ञान का अभाव,संस्थानगत नीतियों का अभाव आदि इन परिस्थितियों हेतु जिम्मेदार हैं । अकादमिक मिसकंडक्ट हेतु उत्तरदाई कारणों में सजगता का अभाव , तकनिकी जानकारिओं का अभाव , बेईमानी, डाटा का अमान्य संकलन ,प्लागारिस्म आदि कारणों पर विस्तार से चर्चा की गयी । विभिन्न निवर्तमान उद्धरणों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह के साथ चर्चा की गयी । उन्होंने सोशल मीडिया के पारिवारिक ढांचे पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी उपस्थित समूह के साथ चर्चा की ।

कार्यशाला का तीसरा सत्र खेल विधि द्वारा शिक्षण एवं अधिगम को कैसे उत्कृष्ट बनाया जाए ,विषय पर केंद्रित था, जिसका संचालन प्रोफेसर श्वेता आनंद , डॉ. लवी सरीकवल द्वारा किया गया ,उनके अनुसार खेल विधि एक ऐसी शिक्षण विधि है ,जिसमें विद्यार्थियों की कई इंद्रियां एक साथ क्रियांवित होती है एवं शिक्षण एवं अधिगम को रोचक बनाती हैं। सत्र की शुरुआत समूह निर्माण एवं समूह सदस्य परिचय से हुई , तत्पश्चात अत्यंत रोचक खेल ,फिशर मैन फिश गेम तथा वाकिंग इन ब्लैंडफोल्ड गेम्स सदस्यों द्वारा खेले गए । इस दौरान प्रतिभागिओं के पारस्परिक सामंजस्य नेतृत्व गुण एवं आपसी विश्वसनीयता का अवलोकन भी किया गया ।यह सत्र समस्त प्रतिभागिओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं लाभदायक रहा ।

इस दो दिवसीय कार्यशाला का समापन गौतम बुद्धा विश्विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भगवती प्रकाश शर्मा के सम्भाषण के साथ हुआ । अपने समापन अभिभाषण में कुलपति महोदय ने अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने तथा नवीन परिवर्तनों से परिचित होने पर भी बल दिया आगंतुकों द्वारा पूछे गए प्रश्नो के जवाब में उन्होंने , एक शिक्षक हेतु अपेक्षित योग्यताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक को छात्रों के साथ सांवेगिक तारतम्यता स्थापित करनी चाहिए । कुलपति ने इस प्रकार की कार्यशालाओं की आवश्यक्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों केव्यक्तित्व पर अपना गहरा प्रभाव डालते हैं । उन्होंने वर्तमान में हुए विभिन्न शोध निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि नकारात्मक व सकारात्मक अप्रोच हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व पर अपना गहन प्रभाव डालती है।वर्तमान समय की आवश्यकता है कि हम शिक्षकों के भीतर शिक्षण के प्रति पैशन विकसित करें ,ताकि वे छात्रों के उज्जवल भविष्य के निर्माता बनने में अपनी महती भूमिका निभा सकें ।

कार्यशाला सन्योजक डॉ. विनोद कुमार शनवाल ने समस्त उपस्थित सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया ।

कार्यशाला में उपस्थित समस्त सदस्यों को प्रमाणपत्र वितरित किये गए।विभिन्न सदस्यों ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत हुए अपने अनुभवों को साझा किया । प्रश्नोत्तर प्रक्रिया के माध्यम से जनसमूह ने विषय पर सारगर्भित परिचर्चा की ।

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