शारदा यूनिवर्सिटी : नोबेल पुरुस्कार विजेता वैज्ञानिक चंद्रशेखर की महत्वपूर्ण भूमिका का वर्णन

ग्रेटर नोएडा : शारदा विश्वविधालय में सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन एप्लाइड मैथमैटिक्स एंड फिजिक्स (CARAMP ) द्वारा प्रायोजित “चंद्रशेखर: द जॉय और पेर्लिस ऑफ डूइंग साइंस ” एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमे चंद्रशेखर (नोबेल पुरस्कार विजेता) की महत्वपूर्ण भूमिका का वर्णन किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो के.आर. श्रीनिवासन (पूर्व निदेशक, ICTP) थे|

शारदा विश्वविद्लाय के प्रोफेसर सिद्दीकी, परीक्षा नियंत्रक तथा भौतिकी के वरिष्ठ प्रोफेसर आर सी सिंह तथा कुलपति प्रोफ़ेसर जी आर सी रेड्डी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई | कार्यक्रम के सम्बोधन में कुलपति ने कहा की चंद्रशेखर एक महान वैज्ञानिक, एक कुशल अध्यापक और उच्चकोटि के विद्वान थे| उन्होंने खगोलशाष्त्र, भौतिकी और एप्लाइड मैथमेटिक्स में सराहनीय कार्य किया| खगोलिकी के क्षेत्र में उनकी सबसे बड़ी सफलता उनके द्वारा प्रतिपादित “चन्द्रशेखर लिमिट” नामक सिद्धांत से हुई|

मुख्य अतिथि प्रो के.आर. श्रीनिवासन ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा की चंद्रशेखर मानव की साझी परम्परा में विश्वास रखते थे।चंद्रशेखर जी के अनुसार, “यह एक तथ्य है कि मानव मन एक ही तरीके से काम करता है। इस बात से एक और बात के पता चलता है कि जिन चीजों से हमें आनन्द मिलता है, वे विश्व के हर भाग में लोगों को आनन्द प्रदान करती है| वर्ष 1983 में तारों के संरचना और विकास से सम्बंधित उनके शोध और कार्यों के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया| छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा की खुद पर भरोसा कर इंसान अपनी किस्मत खुद बना सकता है | ऐसी कोई चीज नहीं है, जो हम मेहनत, लगन व आत्मविश्वास से नहीं पा सकते| प्रो श्रीनिवासन ने चंद्रेशखर से सम्बंधित कई अविदित जानकारियों से छात्रों को अवगत कराया |

स्कूल ऑफ़ बेसिक साइंस एंड रिसर्च के डीन एच एस गौर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया तथा आये हुए मेहमानों को धन्यवाद किया| डीन अकादमिक प्रो. राव ने कहा की जीवन में भला ऐसा कौन होगा जो सफल नही होना चाहता है लेकिन वही लोग सफल होते है जो अपने देखे हुए सपनों को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत करते है|

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