पाकिस्तान को जवाब देने का सही समय – कर्नल धीरेन्द्र

ग्रेटर नोएडा : पाकिस्तान को जवाब देने का सही समय आ गया है. अब निंदा से बात नही बनेगी,सैनिकों ने अपने प्राण दे दिए, ताकि ये देश सुरक्षित रहे। उन्होंने अपने आप को इतिहास कर दिया, ताकि हमारा वर्तमान सुरक्षित रहे। जब पहली गोली लगती हैं तो सबसे पहले परिवार याद आता हैं, किन्तु एक सैनिक देश प्रेम के लिए लड़ता है और अपने प्राण गँवा कर राष्ट्र को बड़ा कर जाता है ।
एक सैनिक की शहादत सिर्फ देश के लिए अपूर्णीय क्षति नहीं है. इससे एक गरीब परिवार और बूढी माँ का एकलौता सहारा छीन जाता है, बूढी माँ को अपने जवान बेटे के पार्थिव शरीर का माथा चूमना पड़ता है, एक बूढ़े बाप को जवान बेटे की अर्थी को कन्धा देना पड़ता है, उसका वंश खत्म हो जाता है, एक नव विबहिता का सुहाग उजड़ जाता है, एक कुंवारी बहन के सपनों को सहारा देने वाला हमेशा के लिए चला जाता है, एक मासूम को अपने पापा को मुखाग्नि देना पड़ता है और समाज का एक विश्वसनीय सदस्य गुम हो जाता है.
कायर और गद्दार पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देकर उसे उसकी औकात दिखानी है. हम चन्द्रगुप्त, राणा, पृथ्वीराज, शिवाजी और लक्ष्मीबाई के वंशज हैं और भगत सिंह, आजाद एवं राजगुरु के दुलारे हैं. हमसे तो विश्व विजेता सिकन्दर मात खा कर गया है फिर ये गीदड़ और कायर पाकिस्तान की क्या औकात.
किन्तु यह भी याद रहे कि हमारा देश हमेशा अपने घर के जयचन्दों से हीं हारा है। एक सर्जिकल स्ट्राइक देश के इन गद्दारों पे भी जरुरी है. हमारे पास बुद्ध भी है और युद्ध भी. अभी युद्ध का समय आ गया है. हमें यह नहीं सोचना की कुछ स्वार्थी नेता, कुछ स्वार्थी देश और कुच्छ बेईमान अंतराष्ट्रीय संस्थाएं क्या कहेंगी.
विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक भारतीत सेना अच्छी तरह जानती है कि इन कायर गीदड़ों से कैसे निपटना है. उन्हें सिर्फ समाज और देश का समर्थन और काम करने एवं फैसला लेने की स्वतंत्रता चाहिए. सभी राजनीतिक दलों को भी राष्ट्र संकट की इस घड़ी में अपनी बहादुर सेना के साथ खड़े होकर दुश्मनों का छक्का छुड़ाने में उनका समर्थन करना चाहिए.

लेखक परिचय:
कर्नल (डॉ) धीरेन्द्र कुमार १९९९ में कैप्टेन रैंक में कारगिल लड़ाई में ५ वीं विकाश बटालियन का रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर रहते हुए, दिन रात एक कर अन्य चार बटालियनों को भी कुशलता पूर्वक मेडिकल कवर देते हुए पचासों जवानों की जान बचाई.

२००८- ०९ में ले कर्नल रैंक में वर्तमान सेनाध्यक्ष (उस समय ब्रिगेडियर विपिन रावत) के नेतृत्व में अंतर राष्ट्रीय शान्ति सेना के तरफ से कांगो में भाग लिया जहाँ एक हवाई दुर्घटना सहित कई मौकों पर अति कुशल मेडिकल कवर देते हुए कांगों के पचासों सैनिकों और आम नागरिकों की जान बचाई.

वर्तमान में सेवा निवृत्ति लेकर ग्रेटर नोयडा में आम लोगों को नियमित रूप से निःशुल्क चिकित्सा परामर्श दे रहे हूँ.

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