सैमसंग में रोजगार दिलाने को लेकर अधिकारीयों ने हाथ खड़े किये , किसान बिफरे

ग्रेटर नोएडा : स्थनीय युवकों को सैमसंग कंपनी में रोजगार में 50 प्रतिशत आरक्षण को लेकर मंगलवार को नोएडा प्राधिकरण और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक बेनतीजा निकली . नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ समेत अन्य अधिकारीयों ने युवकों को रोजगार दिलाने को लेकर अपने हाथ खड़े कर लिए जिसके बाद किसान बिफर गए . आज संयुक्त किसान अधिकार आन्दोलन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की —

जैसा की आपको विदित है किसानों और नौजवानों द्वारा रोजगार, 10% आबादी प्लॉट, लीज बैक, पंचायत चुनाव, नई अधिग्रहण कानून के अनुसार जमीन का रेट, आदि मांगों को लेकर 30 मई से आज तक आंदोलनरत हैं इसी क्रम में 21 अगस्त को सैमसंग कंपनी पर रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए 49 नौजवान लुकसर जेल में 7 दिन तक बंद रहे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर 18 सितंबर को धरना व प्रदर्शन किया। इसके उपरांत 10 अक्टूबर को संयुक्त किसान अधिकार आंदोलन के बैनर पर सैमसंग कंपनी पर हजारों की संख्या में नौजवानों व किसानो ने रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जिसमें वहां पर मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट ने वार्ता करवाने का प्रस्ताव रखा जिसे आंदोलनकारियों ने मंजूर कर लिया उसी वार्ता के क्रम में 23 अक्टूबर को नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड रूम में एसीईओ औद्योगिक, ओएसडी राजेश सिंह सिटी मजिस्ट्रेट, ओएसडी नवीन कुमार, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के साथ रोजगार के मुद्दे पर बात हुई वार्ता के दौरान एसीईओ ने अवगत कराया कि हम आप की वार्ता सैमसंग कंपनियों के अधिकारियों से कराने में सक्षम नहीं है जब तक शासन स्तर से कोई आदेश निर्देश नहीं आता है तब तक हम कंपनी के प्रतिनिधियों से वार्ता नहीं करा सकते संयुक्त किसान अधिकार आंदोलन की तरफ से वार्ता में रविंद्र भाटी डॉ रूपेश वर्मा मनोज डाढ़ा, मनोज चौधरी, हरिओम भाटी,अजीपाल,राजू भाटी, गंगेश्वर दत्त शर्मा, रणवीर मास्टर जी सुनील फौजी विजय एडवोकेट आदि ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा की ऐसी वार्ता का क्या फायदा है जिस में अक्षम अधिकारी वार्ता के लिए उपस्थित हैं वार्ता के क्रम में एसीईओ ने अवगत कराया आज दिनांक तक किसी भी ग्रुप या व्यक्तियों ने रोजगार की नीति निर्माण के लिए आंदोलन नहीं किया है यह पहला आंदोलन है जिस में रोजगार के मुद्दे पर वार्ता की शुरुआत हुई है नोएडा प्राधिकरण की लीज डीड में 5% स्थानीय युवकों को रोजगार देने की नीति पहले से बनी हुई है लेकिन वह भी कितनी लागू हुई है इसका आंकड़ा हमारे पास नहीं है इसका आंकड़ा हम इकट्ठा करा कर आपको अवगत कराएंगे आंदोलनकारियों ने मांग रखी नये भूमि अधिग्रहण कानून में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों जिसमें भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं को योजना प्रभावित माना गया है जिसके आधार पर परिवार के एक सदस्य को अनिवार्य रूप से योग्यता अनुसार रोजगार देने का प्रावधान किया गया है प्राधिकरण के स्तर पर आज दिनांक तक यहां लगने वाली औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवकों को अथवा अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार की कोई नीति नहीं बनाई गई है न ही उनके रोजगार की कोई व्यवस्था की गई है जिस कारण क्षेत्र में भारी पैमाने पर बेरोजगारी फैली हुई है यदि यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब महाराष्ट्र और गुजरात की तरह स्थानीय लोग बाहर से कार्य करने आए लोगों को यहां से खदेड़ना शुरू करेंगे समय रहते प्राधिकरण में 50% रोजगार की नीति का बनाया जाना अति आवश्यक है।

रविंद्र भाटी ने अवगत कराया है कि आंदोलन करने के बावजूद सरकार व प्राधिकरण के अधिकारी रोजगार की समस्या को लेकर व अन्य समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं यही वजह है इतने आंदोलन के बावजूद ए सी ई ओ स्तर की वार्ता कराई गई है जबकि तय हुआ था कि वार्ता के दौरान सीईओ नोएडा व सैमसंग कंपनी के अधिकारी मौजूद रहेंगे जिससे किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके प्रशासन व प्राधिकरण की असंवेदनशीलता की वजह से ही हम किसानों व नौजवानों को अपनी वाजिब मांगों के लिए लगातार आंदोलन करना पड़ रहा है डॉ रुपेश वर्मा ने कहा यह सरकार स्थानीय युवकों वे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की समस्याओं को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है डॉ रुपेश वर्मा ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के अधिकारियों का हित यहां पर पैसा कमाना है न कि यहां के नौजवानों की बेरोजगारी को दूर करना । मनोज डाढा ने कहा कि प्रशासन व प्राधिकरण रोजगार के मुद्दे पर जरा भी गंभीर नहीं है और इनकी बातों से लग रहा है कि यह लोग सैमसंग कंपनी में आंदोलनकारियों की वार्ता कराने में बिल्कुल भी सक्षम नहीं है इसलिए अभी वार्ता पूरी तरह विफल रही है ऐसी वार्ता का कोई अर्थ नहीं है जिसमें अधिकारी अपने आप को अक्षम बताते हो हमारे पास आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्राधिकरण, प्रशासन व शासन की होगी रणवीर मास्टर जी ने कहा हम लोगों ने मुख्यमंत्री, औद्योगिक मंत्री सतीश महाना व प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह से एक एक राउंड वार्ता कर चुके हैं परंतु मंत्रियों से लेकर अफसरों तक कोई भी व्यक्ति किसानों और नौजवानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं कल नोएडा प्राधिकरण में सिर्फ रोजगार के मसले पर वार्ता होनी थी परंतु इस वार्ता की गंभीरता को प्रशासन नहीं समझ रहा है यही वजह रही कि वार्ता के दौरान अक्षम अधिकारियों को वार्ता करने के लिए भेज दिया गया। सुनील फौजी ने कहा यह सरकार पूरी तरह असंवेदनशील हो गई है इसके खिलाफ लगातार आंदोलन करने के अलावा कोई चारा नहीं है हम किसान और नौजवान अपनी समस्याओं को हल कराये बिना चुप नहीं बैठेंगे यदि हमारे इलाके में कोई औद्योगिक इकाई कार्य करना चाहती है तो उसे यहां के स्थानीय युवकों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी देनी होगी। आज इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से 23 अक्टूबर को हुई वार्ता के नतीजों से अवगत कराया जा रहा है वार्ता पूरी तरह विफल रही रोजगार की समस्या को लेकर प्रशासन सरकार व प्राधिकरण बिल्कुल भी गंभीर नहीं है जल्द ही बैठक बुलाकर संयुक्त किसान अधिकार आंदोलन की टीम आगे के आंदोलन की रणनीति बनाएगी।

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