होम बायर्स पर नेफोवा की प्रभारी मंत्री से मुलाकात, सरकार की अबतक की पहल को बताया असंतोष जनक

आज सुबह ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के परिसर में नेफोवा के अधिकारियों ने गौतमबुद्ध नगर के प्रभारी तथा राज्य के आवकारी मंत्री श्री जय प्रताप सिंह तथा जेवर के विधायक श्री धीरेंद्र सिंह से फ्लैट ख़रीदारों के मुद्दे पर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मंत्री जी के सामने प्राधिकरण और बिल्डरों की मिलीभगत की सारी सच्चाई सामने रखी गई। साथ ही यह बताया गया कि कई दफा मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों के साथ मीटिंग हुई, मंत्रियों की कमिटी का गठन भी हुआ, लेकिन आज भी फ्लैट खरीदारों की समस्या जस की तस है। सरकार की तरफ से फ्लैट दिलाने के जो दावे किए जा रहे हैं, उनमे कोई सच्चाई नहीं है। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद बिल्डरों के ऊपर कार्रवाई करने में सरकार तथा प्रशासन हिचक रहे। प्राधिकरण द्वारा बिना जांच के बिल्डरों को CC/OC मुहैया कराया जा रहा है। मीटिंग में नेफोवा की तरफ से प्रभारी मंत्री जी को फ्लैट ख़रीदारों के तमाम मुद्दों से संबंधित रिपोर्ट सौंपी गई है। हमे बताया गया है कि रिपोर्ट को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर तथा मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा।

नेफोवा के अधिकारियों ने प्रभारी मंत्री जी से बताया कि क्षेत्र के बिल्डर हाउसिंग प्रोजेक्ट में घर बुक कराए तमाम फ्लैट खरीदार लगातार बिल्डर की जालसाजियों का शिकार होते रहे हैं। राज्य में बीजेपी की सरकार आने के बाद उम्मीद की किरण जगी थी, लेकिन अब वो उम्मीद धीरे धीरे टूटने लगी है। नेफोवा ने आज निम्नलिखित मुख्य बिन्दुओ पर चर्चा करते हुए मंत्री जी के समक्ष फ्लैट ख़रीदारों की समस्याओं को रखा।

1. फ्लैट के पोजेसन में अनिश्चितता:
क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट अभी भी अधर में लटके हैं, जिनमें या तो काम पूर्णतया बंद है या काफी धीमी गति से काम चल रहा है। सरकार 35 हजार लोगों को उनका घर दिलाने का दावा तो कर रही है लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा बहुत कम है। जिन फ्लैट का कब्जा दिया भी गया है, उनमे वे ही प्रोजेक्ट शामिल है जिनका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था तथा सिर्फ उन्हें कम्पलीशन सर्टिफिकेट मिलना बाकी था। उन प्रोजेक्ट की कोई बात नही हो रही, जिसके बिल्डर फरार है या जेल जा चुके है और काम पूरी तरह ठप्प हैं। आम्रपाली,यूनिटेक, जेपी, अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रिमिया ग्रुप, सुपरटेक इत्यादि कई बिल्डरों के कुल मिलाकर लगभग डेढ़ लाख से भी अधिक फ्लैटों का भविष्य अधर मे है। तथा इन प्रोजेक्ट को पूरा कराने की दिशा में सरकार अभी तक कोई कदम नही उठा पाई है।

2. बिल्डरों के ऊपर कोई कार्रवाई नही :
एफआईआर दर्ज कराए जाने के बावजूद किसी भी बिल्डर के ऊपर कोई कार्रवाई नही होती है। दलील ये दी जाती है कि बिल्डर जेल चला जाएगा तो घर कौन बनाएगा। प्रशासन चाहे तो प्रोजेक्ट की कंपनियों के जहां दो, तीन या उससे ज्यादा डाइरेक्टर होते हैं वहां एक को तो जेल में डाल सकती है। लेकिन प्रशासन पहले की तरह अभी भी मूकदर्शक बना हुआ है।

3. प्राधिकरण के अफसर पर कोई कारवाई नहीं:
नोएडा प्रधिकारण हो या ग्रेटर नोएडा प्रधिकारण, जो अफसर 2010 में थे, वे आज भी वहां तैनात है। जिन अफसरों ने बिल्डरों को गलत तरीके से जमीन आवंटित किया, खुले आम अपार्टमेंट एक्ट का बिल्डरों को उल्लंघन करने की छूट दी, उनके ऊपर न तो कोई कार्रवाई हुई न ही उन्हें हटाया गया। ऐसे में प्रधिकारण से ये कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे अब बिल्डरों को फायदा नही पहुंचाएंगे और बायर के हित का ध्यान रखेंगे।

4. प्राधिकरण का दोहरा चरित्र:
एक तरफ प्राधिकरण ये दावा करती है कि वे बायर के साथ खड़ी है। जबकि आम्रपाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में सुनवाई के दौरान प्राधिकरण सिर्फ अपने फण्ड की रिकवरी की बात करती है। बायर को उनका फ्लैट मिले, इसपर कभी भी प्राधिकरण ने कभी कोई रुचि नही जाहिर की।

5. बिल्डर द्वारा मनमाने चार्ज से ग्राहक परेशान:
सुपरटेक, बुलंद एलिवेट्स, वेदांतम जैसे कई ऐसे बिल्डर हैं, जो फ्लैट ख़रीदारों से फार्मर कंपनसेशन, वाटर चार्जेज, लेबर सेस, एस्क्लेशन चार्ज के नाम पर दो लाख से लेकर पंद्रह लाख तक की भारी रकम गलत तरीके से वसूल रहे हैं। प्राधिकरण, क्रेडाई हर जगह शिकायत की गई लेक़िन कोई फायदा नही हुआ।

6. मनमाना ट्रांसफर चार्ज:
बिल्डरों द्वारा ट्रांसफर शुल्क के नाम पर अच्छी खासी रकम ख़रीदारों से वसूली जा रही है। जहां ट्रांसफर चार्ज निःशुल्क होना चाहिए वहां 10 रुपये प्रति स्क्वायर फ़ीट के हिसाब से शुल्क लिया जा रहा है।

7. बिना जांच के प्राधिकरण द्वारा CC/OC जारी :
प्रोजेक्ट का काम पूरी तरह समाप्त होने के पहले ही प्राधिकरण द्वारा आनन फानन में कम्पलीशन तथा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में रहने लायक सारी सुविधाएं पूरी की गई है या नही, बिजली पानी की समुचित व्यवस्था हैओ या नही, सारी एमिनिटीज बनकर तैयार है कि नही, इसकी कोई जांच नहीं की जा रही और धड़ल्ले से CC/OC जारी किया जा रहा है।

आज हुई मीटिंग में नेफोवा की टीम ने मंत्री जी से ये अनुरोध किया कि समाधान की दिशा में राज्य सरकार जल्द कोई ठोस कदम उठाए। साथ ही यह भी कहा कि यदि कोई कमिटी बनती है तो स्थानीय विधायकों को भी कमिटी का सदस्य बनाया जाए ताकि वे क्षेत्र स्तर पर बिल्डर तथा प्राधिकरण संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मुहैया करा सकें। मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि हमारी समस्याओं पर प्रमुखता से विचार किया जाएगा तथा हमारी बात को आगे ग्रुप ऑफ मिनिस्टर तथा मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाया जाएगा। आज की मीटिंग में नेफोवा की तरफ से श्वेता भारती, इंद्रिश गुप्ता, तपेंद्र पाठक, आदित्य अवस्थी आदि उपस्थित रहे।

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