यमुना प्राधिकरण की 63वीं बोर्ड बैठक संपन्न

ग्रेटर नोएडा : आज यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक आहूत की गई। बैठक के दौरान विभिन्न मसलों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ-साथ कई मुद्दों पर सहमति बनी।

इस बार की बैठक में प्राधिकरण ने अपना वार्षिक बजट घोषित किया गया। ऐसी बात सामने आ रही थी कि बिल्डरों ने बायर के साथ धोखाधड़ी की है। बायर से लिए गए पैसे को संबंधित प्रोजेक्ट में न लगा कर दूसरे जगह निवेश कर दिया गया है। ऐसे बिल्डरों के खिलाफ कार्यवाई की योजना बनाया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के प्रस्ताविक मुख्य बिंदु :

*आपको बता देना चाहते है कि वर्ष 2016 -17 में कुल प्राप्त रूपये लगभग 1,509 करोड़ तथा वर्ष 2017 -18 में प्राप्त रूपये लगभग 2,174 करोड़ हुए है जो कि वर्ष 2016-17 के बजट से 44% अधिक है। 

* वर्ष  2018 -19 के बजट में रूपये लगभग 3,879 करोड़ की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है ,जो कि 2017 -18 की प्राप्तियों के सापेक्ष में 78% अधिक है ,इसका मुख्य कारन इन्वेस्टर सम्मिट में निष्पादित हुए एम०ओ०यू० में ओधोगिक ,मिक्स लैंड यूज व आदि अन्य सम्पत्तियों के विक्रय से प्राप्तियां व अन्य राजस्व पद में होने वाले प्राप्तियों से है। 

वर्ष 2016 -17 में ब्याज एवं अग्रिम के रूप में रूपये लगभग 443 करोड़ आहरित की गयी ,तथ वर्ष 2017 -18 में रूपये लगभग 863 करोड़ की धनराशि आहरित की गयी ,जिसमे से रूपये लगभग 600 करोड़ भूमि अधिग्रहण व अतिरिक्त प्रतिकर के भुगतान हेतु व रूपये लगभग 150 करोड़ एवं निर्माण कार्य हेतु बैंको से कर्ज लिया गया। 

* वर्ष 2018 -19 में रूपये लगभग 1 ,070 करोड़ ब्याज एवं अग्रिम के रूप में लेने का लक्ष्य रखा गया है। 

* राजस्व प्राप्तियाँ में सम्पत्ति के विक्रय से वर्ष 2016 -17 में रूपये लगभग 1,040 करोड़ तथा वर्ष 2017 -18 में रूपये लगभग 1,232 करोड़ की प्राप्ति हुई जो कि वर्ष 2016 -17 से अधिक है। 

 * वर्ष 2018 -19 हेतु कुल राजस्व की प्राप्ति के संबंध में रूपये लगभग 2809 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है ,जिसमे रूपये 2,595 करोड़ की राजस्व प्राप्तियों का लक्ष्य परिसम्पत्तियों की किश्तों व बेचने से रखा गया। 

* अन्य राजस्व प्राप्तियो में ब्याज ,सम्पत्तियों। लीज रेंट व अन्य भी शामिल है ,जिसमे वर्ष 2016 -17 में रूपये 26 करोड़ की प्राप्ति हुई व वर्ष 2017 -18 में रूपये लगभग 79 करोड़ की प्राप्ति हुई जो कि गत वर्ष से 204 % अधिक है ,इस वित्तीय वर्ष में रूपये लगभग 214 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। 

शहरी क्षेत्र में डेयरी विलेज को चिन्हित करने का फैसला:

यमुना एक्सप्रेस प्राधिकरण क्षेत्र में गोशाला संचालन की अस्थायी अनुमति इस शर्त के साथ प्रदान की गयी ,चूँकि गौशाला पूर्णतः कृषि कार्य है अतः इसकी आवश्यकता का परीक्षण कर जिला प्रशासन द्वारा गौशाला संचालन की अनुमति दी जाती है। जिस पर स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता ,जिला प्रशासन द्वारा आवेदक से इस संबंध में शपथ पत्र भी लिया जा सकता है कि प्राधिकरण द्वारा भूमि की आवश्यकता होने पर आवेदक द्वारा प्रश्नगत भूमि को प्राधिकरण के पक्ष में उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न नहीं किया जायेगा। साथ ही अर्बन क्षेत्र में डेयरी विलेज को चिन्हित करने का निर्णय भी बोर्ड बैठक में लिया गया है।                      

      

आवंटियों की मांग पर बिना रुकावट शुल्क प्रदान करे 

जे० पी० इंफ्राटेक लिमिटेड को आवंटित एल०एफ०डी० -1,नोएडा के उप पट्टाधारकों को अपने आवासीय भूखण्डो पर भवन निर्माण कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु निर्धारित अंतिम तिथि दिनांक 31 मार्च 2018 को आवंटियों की मांग पर बिना रुकावट शुल्क प्रदान किये एक वर्ष अर्थात दिनांक 31 मार्च 2019 तक बढ़ाने का निर्णय भी बोर्ड बैठक द्वारा लिया गया।  

आवासीय भूखण्डो के लिए 180 दिन की समय सीमा

प्राधिकरण द्वारा जारी बी०एच०एस० की ओपन एंडिड योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों पर प्रत्येक महीने की पहली तारीख को कार्यवाही करते हुए आवेदकों की इच्छानुसार (उपलब्धता के अनुसार) भवन संख्या का आवंटन किये जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही प्राधिकरण की समस्त बी०एच०एस० योजनाओं एवं अन्य सभी आवासीय भूखण्ड योजनाओं को चैक लिस्ट जारी होने की तिथि 60 दिन के स्थान पर 180 दिनों की समयावधि पूर्वगामी प्रभाव से दिए जाने का निर्णय लिया गया।         

तीनों गाँव के किसान अतिरिक्त प्रतिकर के वितरण का कार्य करने का लिया फैसला  

वही ग्राम जगनपुर , अफजलपुर, दनकौर एवं फतेहपुर अट्टा में अर्जन की कार्यवाही चकबंदी प्रक्रिया के दौरान की गई थी तथा अर्जन प्रक्रिया में प्रतिकर का वितरण अपर जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा था।  इसी बीच एक रिट याचिका संख्या पी०आई०एल० -33088/2014 बौधिस्त्वा समाज सेवा संस्थान उत्तर प्रदेश एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 18 अन्य  में मान्य  उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चकबंदी प्रक्रिया में हुई अनियमितता की जांच के संबंध में योजित की गई।  माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उच्च स्तरीय समिति द्वारा ग्राम समाज की भूमि के खुर्द बुर्द करने के विषय में जांच की गई।  जांच में ग्राम समाज को हानि पहुंचा कर, उसकी भूमि कृषकों को चकबंदी प्रक्रिया के दौरान हस्तांतरित करने के प्रकरण सामने आए।  यह भी ज्ञातत्व है चकबंदी प्रक्रिया के दौरान खसरा संख्या तथा उनकी अवस्थिति में परिवर्तन हो जाता है।उच्च स्तरीय समिति द्वारा जाँच विचारधीन होने तथा उसके अंतिम परिणाम के अप्राप्त होने के कारण प्राधिकरण द्वारा उपरोक्त गाँव में अतिरिक्त प्रतिकर का वितरण नहीं किया गया है। 

इस संबंध में आज बोर्ड द्वारा निर्णय लिया गया है कि इन गाँव में मूल प्रतिकर का वितरण अपर जिलाधिकारी कार्यलय द्वारा किया गया था। तथा उच्च स्तरीय समिति द्वारा जाँच के बाद अधिकारी अभिलेखों में संसोधन का कार्य भी जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा ही किया जाना है ,अतः ऐसी स्तिथि में कृषकों एवं आवंटियों की समस्या के निराकरण के दृष्टिगत शासनादेशों की शर्तो का पालन करते हुए उपरोक्त तीनों गाँव के पात्र किसानो को अतिरिक्त प्रतिकर के वितरण का कार्य अपर जिलाधिकारी (भू०अ०) से ही कराए जाने का फैसला लिया गया। 

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