गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ‘बौद्ध धर्म और समकालीन विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण: प्रासंगिकता, नैतिकता एवं मानव कल्याण’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन की ओर से भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), भारत सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा।
सम्मेलन में भारत और विदेशों से करीब 50 विद्वान एवं शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं। विभिन्न सत्रों में बौद्ध दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, नैतिकता, चेतना, कारण-कार्य संबंध और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।
अध्यक्षीय संबोधन में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशील चिंतन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए इसके उपयोग के लिए उचित नियामक व्यवस्था, सुरक्षा उपायों और नैतिक दिशानिर्देशों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए।
कार्यक्रम में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बौद्ध दर्शन में तर्कशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विचार रखते हुए कर्म सिद्धांत तथा प्रतीत्यसमुत्पाद की चर्चा की और इन्हें कारण-कार्य संबंध, तार्किक चिंतन एवं नैतिक आचरण से जोड़ा।
जर्मनी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय से जुड़े डॉ. रॉल्फ ने तिब्बती चिकित्सा और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया। वहीं प्रो. आर.सी. प्रधान ने ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण के भारतीय चिंतन में आयाम’ विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया और समकालीन समस्याओं के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें ‘बुद्धिस्ट नॉलेज सिस्टम एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: एथिक्स, कॉन्शसनेस एंड फ्यूचर टेक्नोलॉजीज’, ‘सम फेसट्स ऑफ बुद्धिज्म इन द मॉडर्न वर्ल्ड’ और ‘बौद्धधर्म: ए प्रैक्टिकल साइकोलॉजी’ शामिल हैं।
सम्मेलन में करुणा, माइंडफुलनेस, नैतिकता, चेतना, मानवीय आचरण और परस्पर निर्भरता जैसी बौद्ध अवधारणाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर भी चर्चा हो रही है। विभिन्न विषयों के विद्वानों की सहभागिता से बौद्ध दर्शन, विज्ञान और समकालीन सामाजिक सरोकारों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन निदेशक डॉ. चिंतला वेंकट सिवासाई ने अतिथियों, विद्वानों, शोधकर्ताओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
