रोबिन हत्याकांड में तीन सगे भाइयों को उम्रकैद, शव नहर में फेंकने वाले को पांच साल की सजा
ग्रेटर नोएडा। पाली गांव के चर्चित रोबिन सिंह हत्याकांड में अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुबोध, रवि और सागर को हत्या का दोषी मानते हुए प्रत्येक पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने पर तीनों को एक वर्ष दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले में चौथे दोषी बागपत निवासी मनीष को साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया गया। अदालत ने उसे पांच वर्ष के कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, सुबोध, रवि और सागर की मां अंजू तथा बहन मोनिका को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
एडीजीसी अपराध धर्मेंद्र जैंत के अनुसार, सूरजपुर कोतवाली में मामले की शुरुआत रोबिन सिंह की गुमशुदगी के रूप में हुई थी। फरवरी 2022 में पाली निवासी 22 वर्षीय रोबिन घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटा। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तलाश शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर रोबिन के साथ अनहोनी की आशंका सामने आई और गुमशुदगी के मामले को हत्या की धाराओं में तरमीम कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, रोबिन का गांव की एक युवती से प्रेम प्रसंग था। युवती की वर्ष 2019 में शादी हो गई थी, जिसके बाद उसने रोबिन से दूरी बना ली थी। पुलिस जांच में सामने आया कि इसके बावजूद रोबिन उसे परेशान करता था। युवती ने इसकी जानकारी अपनी बहन मोनिका को दी थी। इसके बाद रोबिन की हत्या की साजिश रची गई।
जांच के अनुसार, 27 फरवरी को युवती ने फोन कर रोबिन को मायके बुलाया था। वहां उसके भाई सुबोध, सागर और रवि समेत अन्य लोग मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान रोबिन की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। उसकी पहचान और घटना से जुड़े साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को कोट नहर में फेंक दिया गया।
मामले में पुलिस ने सुबोध, सागर, रवि, मनीष, अंजू और मोनिका के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत फैसला सुनाया।
