यूपी रेरा में क्यूपीआर के साथ प्रोफेशनल सर्टिफिकेट की डिजिटल फाइलिंग शुरू
आर्किटेक्ट, इंजीनियर और सीए को अब अलग-अलग PDF अपलोड करने की जरूरत नहीं, वेबिनार में समझाई नई प्रक्रिया
लखनऊ/गौतमबुद्धनगर, 17 सितंबर। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने प्रमोटरों, आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट को क्यूपीआर के साथ प्रोफेशनल सर्टिफिकेट की डिजिटल सबमिशन प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए गुरुवार को वेबिनार आयोजित किया। यूपी रेरा 2.0 पोर्टल के तहत अब आर्किटेक्ट का REG-1, इंजीनियर का REG-2 और चार्टर्ड अकाउंटेंट का REG-3 अलग-अलग PDF फाइल के रूप में अपलोड करने के बजाय डिजिटल फॉर्म के माध्यम से जमा किया जाएगा।
एक ही लिंक से जमा होंगे तीनों प्रमाणपत्र
नई व्यवस्था में प्रमोटर को पहले संबंधित तिमाही में हुए कार्य की जानकारी क्यूपीआर में दर्ज करनी होगी और प्रगति से संबंधित फोटो या वीडियो अपलोड करने होंगे। इसके बाद ‘Initiate Digital Submission of Certificates’ विकल्प चुनने पर सिस्टम एक ईमेल तैयार करेगा। इसमें वेब-लिंक और फाइलिंग से जुड़े निर्देश होंगे। प्रमोटर को यह लिंक अपने प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और सीए के साथ साझा करना होगा।
तीनों प्रमाणपत्र इसी वेब-लिंक के माध्यम से क्रमवार जमा होंगे। सबसे पहले आर्किटेक्ट REG-1 जमा करेगा। इसके बाद इंजीनियर REG-2 और अंत में चार्टर्ड अकाउंटेंट REG-3 जमा कर सकेगा। प्रत्येक प्रमाणपत्र में प्रोजेक्ट का रेरा पंजीकरण नंबर सहित आवश्यक जानकारियां सिस्टम में स्वत: उपलब्ध रहेंगी। संबंधित प्रोफेशनल को अपने डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करना होगा।
तीनों प्रमाणपत्र जमा होने के बाद उनकी PDF कॉपी डाउनलोड की जा सकेगी और सिस्टम उन्हें मौजूदा यूपी रेरा पोर्टल पर स्वत: भेज देगा। इसके साथ संबंधित तिमाही की क्यूपीआर फाइलिंग पूरी हो जाएगी।
पिछली तिमाही के आंकड़ों से करना होगा मिलान
वेबिनार में बताया गया कि डिजिटल सर्टिफिकेट में दर्ज आंकड़े पिछली तिमाही में जमा किए गए प्रमाणपत्रों से मेल खाने चाहिए। आर्किटेक्ट को कार्य की तारीखों और टेबल बी की जानकारी में समानता रखनी होगी, जबकि इंजीनियर को अनुमानित लागत और कार्य संबंधी जानकारी REG-1 के अनुरूप रखनी होगी। सीए को अनुमानित लागत का मिलान पिछले प्रमाणपत्र के साथ-साथ इंजीनियर के प्रमाणपत्र और प्रमोटर की अकाउंट बुक में दर्ज आंकड़ों से करना होगा। आंकड़ों में अंतर होने पर फाइलिंग में देरी हो सकती है।
प्रोजेक्ट के अनुसार भरनी होगी टेबल ए और बी
यूपी रेरा ने बताया कि टेबल ए लागू होने वाले प्रोजेक्ट में प्रत्येक टावर या ब्लॉक के लिए अलग से भरी जाएगी। विला प्रोजेक्ट में प्रत्येक सेक्टर के लिए संयुक्त टेबल ए होगी, जबकि प्लॉटेड प्रोजेक्ट में केवल टेबल बी भरनी होगी।
टेबल बी पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक बार भरी जाएगी। इसमें सड़क, नाली, लैंडस्केपिंग, बाउंड्री वॉल, एसटीपी और क्लब हाउस सहित बाहरी एवं साझा विकास कार्यों की जानकारी दर्ज होगी। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि आर्किटेक्ट को प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति का प्रमाणपत्र साइट का निरीक्षण करने के बाद ही जारी करना चाहिए। केवल प्रमोटर से मिली जानकारी के आधार पर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाना चाहिए।
गलती होने पर तीनों प्रमाणपत्र एक साथ होंगे रीसेट
प्रमाणपत्र जमा होने के बाद किसी गलती का पता चलने पर प्रमोटर को यूपी रेरा से संपर्क कर रीसेट का अनुरोध करना होगा। तीनों प्रमाणपत्र एक साथ रीसेट होंगे। किसी एक प्रमाणपत्र को अलग से रीसेट करने की सुविधा नहीं होगी। रीसेट के बाद नया वेब-लिंक जारी किया जाएगा और तीनों प्रमाणपत्र दोबारा निर्धारित क्रम में जमा करने होंगे।
नई डिजिटल व्यवस्था में परेशानी आने पर प्रमोटर और प्रोफेशनल्स यूपी रेरा की सहायता टीम से ईमेल या हेल्पडेस्क के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे। सहायता के लिए प्रोजेक्ट का रेरा पंजीकरण नंबर, प्रोजेक्ट का नाम, समस्या का पूरा विवरण और संबंधित स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराना होगा।
प्राधिकरण के अनुसार डिजिटल सर्टिफिकेट व्यवस्था का उद्देश्य क्यूपीआर फाइलिंग को अधिक व्यवस्थित और जांच योग्य बनाना है। इससे अलग-अलग स्कैन की गई PDF फाइलों के बजाय निर्धारित डिजिटल फॉर्म में जानकारी दर्ज होगी और आंकड़ों की जांच भी सिस्टम के स्तर पर हो सकेगी। इससे प्रोजेक्ट की प्रगति और फंड के इस्तेमाल की निगरानी में मदद मिलने के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
वेबिनार का संचालन यूपी रेरा के रेगुलेटरी कंसल्टेंट ने किया। उन्होंने विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से डिजिटल फाइलिंग प्रक्रिया, प्रमाणपत्र जमा करने के क्रम, आंकड़ों के मिलान और क्यूपीआर फाइलिंग सिस्टम की जानकारी दी।
वेबिनार में यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी, सचिव महेंद्र वर्मा, प्रमुख सलाहकार अब्रार अहमद, रिकवरी ऑफिसर मीनाक्षी द्विवेदी, फाइनेंस कंसल्टेंट सुधांशु त्रिपाठी, लीगल कंसल्टेंट उमंग चौधरी, मीडिया कंसल्टेंट डॉ. आकाश यादव, प्रांजल दीक्षित, एडी सिस्टम्स अमरीश कुमार और गणेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।
