हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकार संगोष्ठी और कवि सम्मेलन
ग्रेटर नोएडा। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में पत्रकार संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के साहित्यकारों, कवियों और पत्रकारों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री मधु मिश्रा की सरस्वती वंदना से हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रज्ञान आंदोलन के संपादक पं. सुरेश नीरव ने की। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साहित्य समाज के शाश्वत सत्य, संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों को स्वर देता है, जबकि पत्रकारिता समकालीन घटनाओं और जनसरोकारों का दस्तावेज प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि बदलते मीडिया परिवेश में पत्रकारिता के सामने विश्वसनीयता, निष्पक्षता, तथ्यपरकता और बाजार के दबाव जैसी चुनौतियां हैं। पत्रकारों को सत्यनिष्ठा और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ इन मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।
दैनिक समाचार पत्र हिंद आत्मा के संपादक एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की कार्यकारिणी के सदस्य अशोक कौशिक ने हिंदी पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के सामने सत्य को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना और समाचार माध्यम की विश्वसनीयता बनाए रखना है। त्वरित समाचार के साथ तथ्य-सत्यापन, निष्पक्षता और जनविश्वास को प्राथमिकता देना जरूरी है।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन हुआ। कवियों ने हिंदी की महिमा, भारतीय संस्कृति, मातृभाषा के गौरव, अध्यात्म, विज्ञान और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवयित्री रचना दीक्षित की कविताओं ने भी श्रोताओं को प्रभावित किया।
आयोजन में राजपाल यादव ‘राज’, उपमा गुप्ता, महेश अद्याना ‘मधुर’, प्रमिला भारद्वाज व्यास, प्रतीक्षा तिवारी, आर.एन. सिंह, के.पी. चौहान, भूदत्त शर्मा, अलका शर्मा, उमानाथ त्रिपाठी, गीता रस्तोगी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राधा बिष्ट, डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा, डॉ. रवींद्र कीर्ति, डॉ. सुनीति रावत, डॉ. एन. झा, मृत्युंजय दीक्षित, रूपचंद्र झा ‘मयंक’, बोधिसत्व गौतम, दया सिन्हा, विमल बहुगुणा, यज्ञपाल सिंह ‘यश’, डॉ. श्रद्धानंद झा, नीलम पाठक, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, ऋषि सिन्हा, अजय शर्मा, दीपशिखा रावल और डॉ. नरेंद्र प्रसाद ‘प्राची’ सहित कई साहित्यकार एवं कवि शामिल हुए।
अमेरिका, चीन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कुवैत और सऊदी अरब से जुड़े प्रवासी साहित्यकारों ने भी ऑनलाइन सहभागिता की। अमेरिका से सुभाष चंद्र लखेड़ा व आनंद कुमार वर्मा, चीन से सुनीता चौहान व चिन्मय चतुर्वेदी, स्विट्जरलैंड से शाश्वती दीक्षित, जर्मनी से शरद गुप्ता व प्रकाश स्वरूप, कुवैत से संगीता चंद्र गुप्ता व उमेश चंद गैरोला तथा सऊदी अरब से डॉ. अजीत वर्मा, सुनीता माहेश्वरी, सुरेंद्र कुमार सैनी, अमीना खातून और अब्बास हैदर सहित अनेक रचनाकार जुड़े।
डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
