पुनर्जन्म विषय पर विद्वानों ने रखे विचार, बंबावड़ में चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का 22वां दिन सम्पन्न
दादरी, 19 अगस्त। सनातन धर्म रक्षार्थ बंबावड़ में आयोजित 26 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का 22वां दिन बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ में पवित्र आहुतियों के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम मीडिया प्रभारी औमवीर आर्य एडवोकेट ने बताया कि महायज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ ले रहे हैं।
बुधवार को यज्ञ में सपत्नीक यज्ञमान के रूप में वैद्य रामचरण के सुपौत्र एवं वीरेंद्र शास्त्री के सुपुत्र डॉ. योगेश आर्य उपस्थित रहे। यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी सत्यव्रत, अजमेर तथा आचार्य रघुराज, कानपुर से पधारे।
पुनर्जन्म पर हुआ बौद्धिक मंथन
महायज्ञ के दौरान आयोजित बौद्धिक सत्र में ‘पुनर्जन्म’ विषय पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने वैदिक दृष्टिकोण से कर्म, आत्मा और पुनर्जन्म के सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि मनुष्य के कर्म उसके जीवन को दिशा देते हैं। उन्होंने धर्म, सदाचार और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय वैदिक परंपरा में आत्मा को शाश्वत माना गया है और कर्म के सिद्धांत को जीवन के आचरण से जोड़कर देखा गया है। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं नैतिक जीवन के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में स्वामी भगवान देव, स्वामी पूर्णानंद जी भरतपुर, स्वामी शिवानंद दादरी, शिव मुनि, जगमाल आर्य, सतीश सुमन मुजफ्फरनगर, प्रदीप प्रधान, वीरेंद्र शास्त्री, ईलमचन्द नागर दुजाना, दिवाकर आर्य, महेंद्र कुमार आर्य, धर्मवीर आर्य, शिवदत्त आर्य, सुभाष आर्य, प्रसन्न मुनि, बिजेंद्र आर्य, महावीर आर्य, इलमचंद आर्य, जगवीर सिंह आर्य, भोपाल नागर, महरचंद महाशय, सतपाल आर्य, प्रेमचंद आर्य, श्रीनिवास आर्य एवं चरणसिंह आर्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
23 अगस्त को होगी पूर्णाहुति
औमवीर आर्य ने बताया कि महायज्ञ 22 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः एवं सायं आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 23 अगस्त को पूर्णाहुति के साथ 26 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का विधिवत समापन होगा।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर वैदिक यज्ञ एवं आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लेने का आह्वान किया।
