गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में एनसीटीई के 32वें स्थापना दिवस और आईटीईपी राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
ग्रेटर नोएडा, 17 अगस्त। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में सोमवार को भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर “इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम: रिफ्लेक्शन, रिफॉर्म एंड रेडीनेस” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित हुआ। सम्मेलन में देशभर से शिक्षक शिक्षा क्षेत्र के शिक्षाविद, विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, विभिन्न आईटीईपी संस्थानों के प्रतिनिधि और विद्यार्थी शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत एनसीटीई अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने परिषद की भूमिका, उपलब्धियों और 32 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। इस दौरान एनसीटीई की यात्रा एवं उपलब्धियों पर आधारित लघु वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।
कई प्रकाशनों और ऐप का शुभारंभ
समारोह के दौरान शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में एनसीटीई की विभिन्न पहलों और नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर मित्रा हैंडबुक, पुष्टि हैंडबुक, पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन और एआई इन टीचर एजुकेशन सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इसके साथ ही मित्रा ऐप और पुष्टि ऐप का भी शुभारंभ किया गया।
शिक्षा मंत्री ने ऑनलाइन किया संबोधित
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ऑनलाइन माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। उन्होंने शिक्षक शिक्षा के महत्व, गुणवत्तापूर्ण एवं सक्षम शिक्षकों के निर्माण और देश की भावी शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षक शिक्षा में नवाचार, गुणवत्ता और समग्र विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में भारत सरकार के विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार, आईएएस भी मौजूद रहे।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षक राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने आईटीईपी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षक किसी भी राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला होते हैं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका के साथ नवीन तकनीकों, डिजिटल संसाधनों और बदलते शैक्षिक परिवेश के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आईटीईपी जैसे कार्यक्रम भावी शिक्षकों को विषयगत ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी दक्षताओं और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने आईटीईपी से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। इसके बाद एनसीटीई की मेंबर सेक्रेटरी सुश्री सुखजीत कौर, आईएफएस ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र का समापन वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सम्मेलन के समापन अवसर पर एनसीटीई अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने समापन संबोधन दिया। श्री सतीश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का समन्वय डॉ. श्रीति कंवर, हेड, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग ने किया।
