पुलिस कमिश्नर के आश्वासन के बाद किसान संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन किया स्थगित
ग्रेटर नोएडा, 17 अगस्त। तीनों प्राधिकरणों से जुड़े किसानों के लंबित मुद्दों को लेकर सोमवार को प्रस्तावित किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन को पुलिस की कार्रवाई के चलते प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस ने आंदोलन में शामिल होने वाले कई किसान नेताओं को उनके घरों पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया। वहीं, किसानों को प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए जगह-जगह मिट्टी डालकर रास्ते भी अवरुद्ध किए गए थे।
बाद में किसानों की गिरफ्तारी के बाद अस्थायी जेल से ही किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय में वार्ता की। पुलिस कमिश्नर ने किसान प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO) और जिलाधिकारी की मौजूदगी में 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून, आबादी सहित किसानों के सभी लंबित मुद्दों पर गंभीर और विस्तृत वार्ता कराई जाएगी।
पुलिस कमिश्नर ने प्राधिकरण स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और किसानों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे की जवाबदेही तय करने का भी आश्वासन दिया। साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।
आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
किसान संघर्ष मोर्चा के प्रमुख नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर के साथ हुई वार्ता सार्थक और ठोस रही। मोर्चे की मुख्य मांग थी कि तीनों प्राधिकरणों के अधिकारी किसानों के मुद्दों पर अलग-अलग बयान देने के बजाय तीनों प्राधिकरणों के CEO और जिलाधिकारी को एक टेबल पर बैठाकर सभी मुद्दों पर गंभीर एवं निर्णायक बातचीत करें। इस मांग पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर के ठोस आश्वासन को देखते हुए वार्ता पूरी होने तक किसान संघर्ष मोर्चा ने अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। वार्ता के परिणाम की समीक्षा के बाद आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को दोबारा और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
‘आंदोलन स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं’
किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसानों की एकता मजबूत है और वे अपने मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से तीनों प्राधिकरणों के CEO के साथ प्राधिकरण स्तर और शासन स्तर से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए आंदोलन किया जा रहा है। 17 जुलाई को भी वार्ता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी थी।
उन्होंने कहा कि अब पुलिस कमिश्नर ने वार्ता कराने का ठोस आश्वासन दिया है और आंदोलन को वार्ता पूरी होने तक स्थगित करने का आग्रह किया है। इसी के चलते मोर्चे ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की है।
किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सरन प्रधान ने कहा कि आंदोलन शुरू हो चुका है और किसानों के मुद्दों के समाधान के बाद ही समाप्त होगा। सोमवार के आंदोलन की प्रमुख मांग तीनों प्राधिकरणों के CEO और जिलाधिकारी के साथ सामूहिक वार्ता थी। अब वार्ता के बाद उसके परिणाम की समीक्षा की जाएगी और जरूरत के अनुसार आगे की रणनीति तय होगी।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि आंदोलन स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं। किसानों के सभी मुद्दों के समाधान के लिए समयबद्ध और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो किसान संघर्ष मोर्चा दोबारा आंदोलन शुरू करेगा।
ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें
किसान संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून का लाभ, आबादी के लंबित प्रकरणों का समाधान और किसानों से जुड़े अन्य सभी मुद्दों का समयबद्ध निस्तारण शामिल है।
आंदोलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल में बुधपाल यादव, प्रशांत भाटी, उदल आर्य, सचिन एडवोकेट, निशांत भाटी, मानव मुखिया, वीर सिंह नगर, जगबीर नंबरदार, इंदर प्रधान, महेंद्र एडवोकेट, मनीष प्रधान, निशांत रावल, उमेश एडवोकेट, जयप्रकाश सहित अन्य किसान नेता शामिल रहे।
