सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना ऐतिहासिक उपलब्धि: प्रो. अरविन्द कुमार सिंह
ग्रेटर नोएडा, 25 जुलाई। गौतम बुद्ध विश्विद्यालय के प्रो. अरविन्द कुमार सिंह ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, प्रज्ञा और अहिंसा जैसे सार्वभौमिक संदेशों की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है।
प्रो. सिंह ने कहा कि सारनाथ वही पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद अपने पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। यहीं से धर्मचक्र प्रवर्तन हुआ और बौद्ध संघ की स्थापना हुई, जिसने विश्व की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं में से एक की नींव रखी।
उन्होंने कहा कि सारनाथ में स्थित धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा सम्राट अशोक का सिंह स्तंभ इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के साक्षी हैं। यूनेस्को की मान्यता से बौद्ध अध्ययन, पुरातात्त्विक अनुसंधान, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही दुनिया भर के श्रद्धालुओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का इस स्थल की ओर आकर्षण बढ़ेगा।
प्रो. सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत और नेपाल के साझा बौद्ध विरासत संबंधों को भी और मजबूत करेगी। लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों का महत्व वैश्विक स्तर पर और बढ़ेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि यूनेस्को की यह मान्यता बौद्ध पुरातात्त्विक स्थलों के संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध का करुणा, नैतिकता और शांति का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक है।
प्रो. अरविन्द कुमार सिंह ने यूनेस्को, भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और इस नामांकन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी संबंधित पक्षों को बधाई देते हुए कहा कि सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत को मिली एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहचान है।
