एनआईआईएमएस में एंटीमाइक्रोबियल स्टुअर्डशिप पर विशेषज्ञ व्याख्यान

ग्रेटर नोएडा, 21 जुलाई। एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा मंगलवार को “एंटीमाइक्रोबियल स्टुअर्डशिप” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, पीजी छात्रों, इंटर्न, नर्सिंग स्टाफ, लैब कर्मियों तथा अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों को संक्रमण के बेहतर इलाज और एंटीबायोटिक दवाओं के सही एवं जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. देवेश कुमार सिंह (चेयरमैन), डॉ. एस. एन. गुप्ता (संरक्षक), डॉ. रंजीत घुलियानी(MS), डॉ. मनीषा जिंदल (संयोजक) तथा डॉ. एन. पी. सिंह (आयोजन अध्यक्ष) के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. राधा चौहान और डॉ. रीति श्रीवास्तव ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम में एम्स, नई दिल्ली के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वर्तमान में एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. गीता सतपथी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रीति श्रीवास्तव के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने पूरे वैज्ञानिक सत्र का संचालन भी किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मदालसा मलिक, डॉ. प्रिया, डॉ. कंचन बहुगुणा, डॉ. मरियाह यूसुफ और डॉ. अम्बरीन शफात खान सहित विभाग के शिक्षकों एवं ट्यूटर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस अवसर पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एन. पी. सिंह ने बताया कि विभाग में हाल ही में ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर सिस्टम, VITEK-2 पहचान एवं एंटीबायोटिक संवेदनशीलता जांच प्रणाली (ID & AST) तथा एसडी बायोसेंसर ऑटोमेटेड इम्यूनोअसे सिस्टम जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं की तेजी और सटीक पहचान संभव हो रही है, जिससे मरीजों को समय पर सही एंटीबायोटिक उपचार मिल सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ब्लड कल्चर जांच को आधुनिक बायोमार्कर परीक्षणों के साथ जोड़ने से संक्रमण की पहचान और उपचार अधिक प्रभावी बनता है।

वैज्ञानिक सत्र में पहला व्याख्यान बायोमेरीयू इंडिया की मेडिकल अफेयर्स लीड डॉ. देवजानी डे ने “फ्रॉम एमआईसी टू मीनिंगफुल एक्शन: लीवरेजिंग VITEK फॉर एंटीमाइक्रोबियल स्टुअर्डशिप” विषय पर दिया। उन्होंने बताया कि VITEK-2 प्रणाली से प्राप्त एंटीबायोटिक जांच रिपोर्ट डॉक्टरों को सही दवा चुनने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट केवल एक जांच नहीं, बल्कि मरीज के इलाज का महत्वपूर्ण आधार होती है, जिससे सही एंटीबायोटिक का चयन, बेहतर इलाज और एंटीबायोटिक प्रतिरोध (एंटीबायोटिक दवाओं का कम असर होना) जैसी बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

दूसरा व्याख्यान एनआईआईएमएस की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. राधा चौहान ने “ऑप्टिमाइजिंग ब्लड कल्चर प्रैक्टिसेज: द फर्स्ट स्टेप टुवर्ड एंटीमाइक्रोबियल स्टुअर्डशिप” विषय पर दिया। उन्होंने ब्लड कल्चर के सही तरीके से नमूने लेने, जांच में अशुद्धि रोकने, समय पर संक्रमण की पहचान करने और वैज्ञानिक आधार पर इलाज शुरू करने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें डॉक्टरों, पीजी छात्रों, इंटर्न, नर्सिंग स्टाफ और लैब कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार उपयोग और मरीजों के बेहतर उपचार के लिए डॉक्टरों तथा माइक्रोबायोलॉजिस्ट के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथि वक्ताओं को सम्मानित किया गया। डॉ. अम्बरीन खान ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी वक्ताओं, अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। इसके बाद हाई-टी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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