गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के बीच एमओयू, पांडुलिपि अध्ययन, डिजिटल आर्काइविंग एवं शोध सहयोग को मिलेगा नया आयाम

भारत की समृद्ध पांडुलिपि परंपरा के संरक्षण, डिजिटल अभिलेखीकरण (डिजिटल आर्काइविंग) तथा उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा एवं इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान पांडुलिपि अध्ययन , डिजिटल आर्काइविंग, क्षमता निर्माण , ज्ञान प्रसार तथा अंतर्विषयक अनुसंधान के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे। यह साझेदारी भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत के संरक्षण एवं वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

समझौता ज्ञापन पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की ओर से श्री कंवल वाली, सचिव तथा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. चंदर कुमार सिंह, कुलसचिव ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के प्रतिनिधिमंडल में श्री के. एन. श्रीवास्तव, निदेशक, डॉ. सुधा गोपालकृष्णन, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, साउथ एशियन मैनुस्क्रिप्ट हिस्टरीज एंड टेक्सचुअल आर्काइव, तथा सुश्री निहारिका गुप्ता, प्रोजेक्ट मैनेजर एवं सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर उपस्थित रहे। वहीं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रो. एस. धनलक्ष्मी, डीन, प्लानिंग एंड रिसर्च, तथा डॉ. चिंतला वेंकट शिवसाई, अध्यक्ष, स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज़ एंड सिविलाइजेशन एवं निदेशक, अंतरराष्ट्रीय मामलों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि यह सहयोग विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारियों को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि भारत की अमूल्य ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से उसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में यह एमओयू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक डिजिटल तकनीकों का समन्वय भविष्य के शोधार्थियों, शिक्षकों एवं समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

एमओयू के अंतर्गत दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, विद्यार्थियों को पांडुलिपि मेटाडाटा निर्माण एवं एनोटेशन का प्रशिक्षण, डिजिटल संरक्षण, संकाय एवं विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, संयुक्त सम्मेलन, कार्यशालाएं, शोध प्रकाशन, प्रदर्शनियां, सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएं तथा शोध अनुदान से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, संहिता (साउथ एशियन मैनुस्क्रिप्ट हिस्टरीज एंड टेक्सचुअल आर्काइव) परियोजना के माध्यम से भारत की पांडुलिपि विरासत को वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थापित करने और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए भी दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे।

यह समझौता प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। इस अवधि में दोनों संस्थानों के बीच सतत शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान विनिमय, क्षमता निर्माण एवं अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

यह एमओयू पांडुलिपि अध्ययन, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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