GIMS की प्रोफेसर का शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित, मेडिकल परीक्षाओं के मूल्यांकन का नया तरीका विकसित
नई चेकलिस्ट से सभी परीक्षक एक जैसे मानकों पर करेंगे मूल्यांकन, छात्रों को मिलेगा बेहतर फीडबैक
ग्रेटर नोएडा। गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा की फिजियोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रेरणा अग्रवाल द्वारा विकसित एक नई मूल्यांकन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। मेडिकल परीक्षाओं में वर्णनात्मक (लंबे उत्तर वाले) प्रश्नों के निष्पक्ष और एक समान मूल्यांकन के लिए तैयार की गई उनकी ‘असेसमेंट-कम-फीडबैक चेकलिस्ट’ पर आधारित शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल BMC Medical Education में प्रकाशित हुआ है।
मेडिकल परीक्षाओं में लंबे उत्तर वाले प्रश्नों के अंक कई बार अलग-अलग परीक्षकों के अनुसार बदल जाते हैं। इसे देखते हुए डॉ. प्रेरणा अग्रवाल ने एक ऐसी चेकलिस्ट तैयार की है, जिसमें हर प्रश्न के सही उत्तर के जरूरी बिंदु, प्रत्येक बिंदु के अंक और मूल्यांकन के स्पष्ट मानक पहले से तय रहते हैं।
इस चेकलिस्ट को मूल्यांकन शुरू होने से पहले सभी परीक्षकों को दिया जाता है। इससे सभी परीक्षक एक ही मानक के आधार पर उत्तरों की जांच करते हैं और अंक देने में पारदर्शिता व समानता बनी रहती है। साथ ही छात्रों को यह भी पता चल जाता है कि उन्होंने किन बिंदुओं पर अच्छा प्रदर्शन किया और कहां सुधार की जरूरत है।
इस चेकलिस्ट का विकास और परीक्षण GIMS के फिजियोलॉजी विभाग में निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता और विभागाध्यक्ष डॉ. भारती भंडारी राठौर के मार्गदर्शन में किया गया।
शोध में पाया गया कि इस नई व्यवस्था से परीक्षकों के बीच अंक देने में अंतर कम हुआ, मूल्यांकन अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बना तथा छात्रों को बेहतर और स्पष्ट फीडबैक मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली मेडिकल कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की परीक्षाओं के मूल्यांकन को और अधिक विश्वसनीय बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
