यूपी रेरा का 43वां रियल एस्टेट एजेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, 51 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण
लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर, 8 जुलाई। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और पेशेवर कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को 43वें रियल एस्टेट एजेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम इंडियन लिटरेसी बोर्ड, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 51 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने किया। वहीं, यूपी रेरा के सचिव महेंद्र वर्मा, प्रमुख सलाहकार अबरार अहमद, वित्त सलाहकार सुधांशु त्रिपाठी, संयुक्त सचिव के.के. सिंह तथा एडी सिस्टम अमरीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
उद्घाटन सत्र में अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि एजेंटों का प्रशिक्षण और प्रमाणन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेरा अधिनियम, उससे जुड़े नियमों और व्यवहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, जिससे वे अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकें।
उन्होंने बताया कि रेरा कानून लागू होने से पहले रियल एस्टेट क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के कारण बिल्डरों, एजेंटों और गृह खरीदारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। रेरा का उद्देश्य इन समस्याओं का समाधान करते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी और सफल अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके बाद ही वे रेरा के तहत पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंट बनने के पात्र होंगे।
प्रशिक्षण के पहले दिन प्रमुख सलाहकार अबरार अहमद ने रेरा अधिनियम, उत्तर प्रदेश रेरा नियम एवं विनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। इसके अलावा परियोजना पंजीकरण की प्रक्रिया, प्रमोटरों की जिम्मेदारियों और नियमों के अनुपालन से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। अंतिम सत्र में एआईजी रजिस्ट्रेशन, लखनऊ ने स्टाम्प एवं पंजीकरण से संबंधित कानूनी प्रावधानों और उनके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।
यूपी रेरा ने रियल एस्टेट एजेंटों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया है। प्राधिकरण का मानना है कि इससे एजेंटों की कार्यकुशलता बढ़ेगी, गृह खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी तथा प्रदेश में अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह रियल एस्टेट व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
