गलगोटिया विश्वविद्यालय में एनआईए के विशेष लोक अभियोजक गौतम खजांची का व्याख्यान, बेल कानून और पीएमएलए पर छात्रों को दी महत्वपूर्ण जानकारी
ग्रेटर नोएडा, 16 जून 2026। गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) एडवोकेट गौतम खजांची ने कानून के विद्यार्थियों को बेल ज्यूरिस्प्रूडेंस, संवैधानिक सुरक्षा उपायों, अनुच्छेद-22 तथा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में आयोजित इस व्याख्यान के दौरान आपराधिक न्याय व्यवस्था, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विधिक प्रक्रिया, आर्थिक अपराधों तथा भारतीय न्याय प्रणाली में राज्य की शक्तियों की व्याख्या जैसे समकालीन विषयों पर गहन चर्चा हुई। विद्यार्थियों को वर्तमान समय में सबसे अधिक चर्चित कानूनी विषयों में से एक, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक हितों के बीच संतुलन की अवधारणा को समझने का अवसर मिला।
अपने संबोधन में एडवोकेट गौतम खजांची ने भारत में जमानत व्यवस्था के संवैधानिक आधारों की व्याख्या करते हुए बताया कि न्यायालयों ने समय-समय पर अपने निर्णयों और न्यायिक व्याख्याओं के माध्यम से बेल कानून को विकसित किया है। उन्होंने न्यायालयों द्वारा जमानत मंजूर या अस्वीकार किए जाने के दौरान अपनाए जाने वाले प्रमुख सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला।
व्याख्यान के दौरान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-22 के तहत उपलब्ध संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें गिरफ्तारी, हिरासत, कानूनी सहायता और न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित आरोपी व्यक्तियों के अधिकारों को समझाया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और आर्थिक अपराधों की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भूमिका पर केंद्रित चर्चा रही। इस दौरान पीएमएलए के तहत जमानत के लिए लागू सख्त “दोहरी शर्तों”, हालिया न्यायिक निर्णयों, वित्तीय अपराधों से जुड़े मुकदमों की जटिलताओं और ऐसे मामलों में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
अपने व्यावसायिक अनुभव साझा करते हुए गौतम खजांची ने जांच प्रक्रियाओं में हो रहे बदलाव, आर्थिक अपराधों की बढ़ती जटिलता तथा वित्तीय और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों के बढ़ते महत्व पर भी विचार रखे।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की और संवैधानिक अधिकारों, ईडी जांच, न्यायिक व्याख्याओं, जमानत कानून तथा न्यायालयी रणनीतियों से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका खजांची ने विस्तार से उत्तर दिया।
यह व्याख्यान हाल ही में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन कम्पेरेटिव लॉ” के बाद आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ ने ऑस्ट्रेलिया के Edith Cowan University School of Business and Law के सहयोग से किया था। सम्मेलन में न्यायपालिका, विधि शिक्षा और कानूनी क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया था।
इस अवसर पर गलगोटिया विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) Dr. Dhruv Galgotia ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ संवाद के अवसर प्रदान करना है, ताकि वे कानून के व्यावहारिक और समकालीन आयामों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
उन्होंने कहा कि आज आपराधिक कानून की चर्चाएं संवैधानिक अधिकारों, वित्तीय विनियमन, प्रौद्योगिकी, डिजिटल साक्ष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों तक विस्तारित हो चुकी हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं की समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
गलगोटिया विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ लॉ व्याख्यानों, मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं, नीति संवादों, विधिक सहायता कार्यक्रमों और शोध सम्मेलनों के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक एवं वैश्विक स्तर की कानूनी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। यह व्याख्यान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
