ग्रेटर नोएडा से ग्लोबल मंच तक चमके गलगोटिया के छात्र, इनोवेशन में बनाई नई पहचान
हांगकांग स्टार्टअप प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व, 18 एप्पल स्विफ्ट चैलेंज विजेता और 3 करोड़ की फंडिंग ने बढ़ाया गौरव
ग्रेटर नोएडा। Galgotias University के छात्र अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीक, स्टार्टअप और इनोवेशन की नई पहचान बना रहे हैं। विश्वविद्यालय के छात्र इन दिनों हांगकांग में आयोजित ग्लोबल ईडीवेंचर्स स्टार्टअप प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यहां छात्र अपने इनोवेटिव आइडियाज, ऐप्स और स्टार्टअप वेंचर्स के जरिए भारतीय प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के इनोवेशन इकोसिस्टम ने पिछले एक वर्ष में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें एप्पल स्विफ्ट स्टूडेंट चैलेंज में 18 छात्रों का विजेता बनना, एप्पल आईओएस इकोसिस्टम पर 37 लाइव ऐप्स लॉन्च करना और अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप नेटवर्क्स के साथ बढ़ती भागीदारी शामिल है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विश्वविद्यालय में तकनीक और स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है।
छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप “साइबरजेनिक्स” ने हाल ही में 3 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल कर नई मिसाल पेश की है। खास बात यह है कि इसके सह-संस्थापकों में एक छात्र की उम्र मात्र 18 वर्ष है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि युवाओं में शुरुआती स्तर से ही उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
विश्वविद्यालय में अब इनोवेशन केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रहा। इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन और मैनेजमेंट समेत विभिन्न विभागों के छात्र मिलकर हेल्थकेयर, एजुकेशन, एक्सेसिबिलिटी और एआई आधारित प्रोडक्ट्स पर काम कर रहे हैं।
गलगोटिया विश्वविद्यालय के अनुसार अब तक यहां से 135 से अधिक स्टार्टअप निकल चुके हैं। इन स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर और 10 करोड़ रुपये के गलगोटिया इनोवेशन फंड का सहयोग दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने Apple, Intel, Cisco, NVIDIA, Salesforce, Tata Technologies और Capgemini जैसी कंपनियों के साथ मिलकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और विशेष लैब्स भी स्थापित की हैं।
हाल ही में Atal Innovation Mission से जुड़े नवाचार विशेषज्ञ Ramana Ramanathan ने विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स “प्रोजेक्ट टैक्टो” और “टेकुरियस” के संस्थापकों से मुलाकात की, जो हांगकांग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। छात्रों ने स्केलेबिलिटी, प्रोडक्ट-मार्केट फिट और रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशन जैसे विषयों पर अपनी समझ और दृष्टिकोण साझा किया।
विश्वविद्यालय के सीईओ Dhruv Galgotia ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी अब यह विश्वास करने लगी है कि वे भारत में रहकर दुनिया के लिए निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर के प्रोडक्ट्स, ऐप्स और स्टार्टअप तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब यह केवल अलग-अलग सफलता की कहानियां नहीं रह गई हैं, बल्कि लगातार विकसित हो रही एक मजबूत इनोवेशन संस्कृति का संकेत हैं, जो आने वाले समय में भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाएगी।
