NIIMS के CME कार्यक्रम में 130 से अधिक डॉक्टर और विशेषज्ञ हुए शामिल
ग्रेटर नोएडा, मई 2026। नोएडा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIIMS) कॉलेज एंड हॉस्पिटल द्वारा THALCARE SUMMIT 2026 CME का सफल आयोजन किया गया। “थैलेसीमिया: पहचान और इलाज में चुनौतियां” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से 130 से अधिक डॉक्टर, मेडिकल विशेषज्ञ, शिक्षक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बीमारी की समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा करना था। सम्मेलन में विशेषज्ञ सत्रों और पैनल चर्चाओं के साथ-साथ क्विज, रील मेकिंग, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसने प्रतिभागियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
यह कार्यक्रम NIIMS के पीडियाट्रिक्स और पैथोलॉजी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। आयोजन समिति में डॉ. अरुण चौधरी और डॉ. अमित मोदी आयोजन अध्यक्ष रहे, जबकि डॉ. वर्तिका गुप्ता और डॉ. अविनाश झा आयोजन सचिव की भूमिका में रहे।
सम्मेलन का आयोजन नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. देवेश कुमार सिंह, चांसलर डॉ. विक्रम सिंह और NIIMS के डायरेक्टर डॉ. एस. एन. गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रंजीत घुलियानी और डॉ. मनीषा जिंदल रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसमें थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान और सही इलाज के महत्व पर जोर दिया गया। सम्मेलन में 5 विशेषज्ञ सत्र और 2 पैनल चर्चा आयोजित की गईं, जिनमें थैलेसीमिया की जांच, इलाज और मरीजों की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि थैलेसीमिया जैसे विषय पर इस तरह के कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने विश्व थैलेसीमिया दिवस पर छात्रों और फैकल्टी की विशेष प्रस्तुतियों की भी प्रशंसा की।
सम्मेलन में डॉ. नीता राधाकृष्णन, डॉ. ज्योत्सना मदान, डॉ. मुकेश ढांकर और डॉ. ज्योति कोटवाल सहित कई प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल हुए।
इस दौरान NIIMS द्वारा थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन संबंधी बीमारियों की जांच के लिए आधुनिक HPLC मशीन शुरू किए जाने की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार इससे मरीजों की स्क्रीनिंग, समय पर पहचान और बेहतर इलाज में काफी मदद मिलेगी।
