गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाई गई 2570वीं बुद्ध पूर्णिमा
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों द्वारा 2570वीं बुद्ध पूर्णिमा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित अतिथियों, बौद्ध भिक्षुओं एवं भिक्षुणियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के डीन एवं डीन अकादमिक प्रो. राजीव वार्ष्णेय के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय प्रशासन, विशिष्ट अतिथियों, भिक्षुओं, भिक्षुणियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया।
सभा को संबोधित करते हुए स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के विभागाध्यक्ष एवं जीबीयू के अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक डॉ. चिंतला वेंकट शिवसाई ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि तीव्र तकनीकी प्रगति के बावजूद मानवता आज भी आंतरिक शांति और ज्ञान की तलाश में है तथा करुणा, सजगता और मध्यम मार्ग पर आधारित बुद्ध के उपदेश आज भी संतुलित एवं सार्थक जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. चंद्र कुमार सिंह ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बौद्ध दर्शन की स्थायी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण और समाज कल्याण में बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्मापा इंटरनेशनल बौद्ध इंस्टीट्यूट के प्रमुख परम पूज्य 17वें ग्यालवा कर्मापा त्रिनले थाये दोर्जे ने प्रेरणादायी मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं तिब्बती बौद्ध धर्म की कर्मा काग्यू परंपरा के माध्यम से आज भी निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य एवं आर्य अष्टांगिक मार्ग को वैश्विक समाज के लिए सार्वभौमिक सिद्धांत बताते हुए उनके महत्व को विस्तार से समझाया। उनके विचारों ने उपस्थित भिक्षुओं, भिक्षुणियों, अनुयायियों एवं विद्यार्थियों को गहराई से प्रेरित किया।
जीबीयू के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के संघ द्वारा, जिसमें वेनरेबल मोंक त्रि मिन सहित अन्य भिक्षु एवं भिक्षुणियां शामिल थीं, थेरवाद एवं महायान परंपराओं के अनुसार बौद्ध मंत्रोच्चारण प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
कार्यक्रम में KIBI से आए भिक्षु, स्कूल ऑफ बौद्ध स्टडीज एंड सिविलाइजेशन के शिक्षकगण, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शोधार्थी, विद्वान एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वेनरेबल डॉ. आनंद एवं वेनरेबल चुग द्वारा किया गया।
समारोह का समापन विश्व शांति, सद्भावना, करुणा तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।
