आंगनवाड़ी केंद्रों के कायाकल्प से प्रारंभिक शिक्षा को मिला नया आधार

यूपी के 40 केंद्रों में बदलाव, बच्चों के लिए बने सुरक्षित और आकर्षक सीखने के स्थान

लखनऊ/बहराइच, 23 अप्रैल 2026। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) को मजबूत करने की दिशा में उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य के 40 आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प कर उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित, आकर्षक और सीखने के अनुकूल वातावरण में बदल दिया गया है। यह कार्य सेसमी वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट और मैरिको लिमिटेड की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत ‘निहार शांति पाठशाला फनवाला’ और ‘सीखो, खेलो, पढ़ो’ पहल के माध्यम से किया गया है।

इस पहल के अंतर्गत लखनऊ, वाराणसी और बहराइच जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों में व्यापक सुधार किए गए हैं। कुल 40 केंद्रों में से 15 लखनऊ, 15 वाराणसी और 10 बहराइच में स्थित हैं। बहराइच जिले के हुजूरपुर ब्लॉक में 10 केंद्रों का विशेष रूप से नवीनीकरण किया गया है।

आंगनवाड़ी केंद्र 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल का पहला आधार होते हैं। इस पहल के तहत इन केंद्रों को केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि सीखने के माहौल के रूप में भी बेहतर बनाया गया है। सरकारी तंत्र के साथ समन्वय में काम करते हुए सेसमी वर्कशॉप इंडिया ने इन केंद्रों को बच्चों के समग्र विकास के अनुकूल बनाया है।

बहराइच में किए गए कार्यों में भवनों की प्लास्टरिंग, फ्लोरिंग और अन्य संरचनात्मक सुधार शामिल हैं। इसके साथ ही शौचालय, स्वच्छ पेयजल और हाथ धोने की सुविधाओं को बेहतर किया गया है। बिजली व्यवस्था में सुधार किया गया है और बच्चों के लिए मैट, टेबल, कुर्सियां जैसे अनुकूल फर्नीचर उपलब्ध कराए गए हैं।

बच्चों के शारीरिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बाहरी खेल क्षेत्रों का भी विकास किया गया है, जहां आयु-उपयुक्त उपकरण लगाए गए हैं। वहीं, कक्षाओं को BALA (Building as Learning Aid) डिजाइन के माध्यम से अधिक रोचक और इंटरैक्टिव बनाया गया है।

इस बदलाव से आंगनवाड़ी केंद्र अब ऐसे स्थान बन गए हैं, जहां बच्चे सुरक्षित माहौल में सीख सकते हैं, खेल सकते हैं और अपनी जिज्ञासा को विकसित कर सकते हैं। इससे बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक और मोटर कौशल के विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही, बेहतर स्वच्छता और पानी की उपलब्धता से बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य में भी सुधार देखा जा रहा है।

इस पहल के तहत सीखने की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। स्टोरी पॉन्ड जैसे नवाचारी शिक्षण उपकरणों और खेल-आधारित सामग्री (TLMs) के जरिए कक्षाओं को अधिक जीवंत और सहभागितापूर्ण बनाया गया है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आनंदपूर्ण और संरचित तरीके से बच्चों को पढ़ाने में मदद मिल रही है।

‘Learn. Play. Grow.’ पहल के अंतर्गत यह कार्यक्रम बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसके साथ ही अभिभावकों और देखभालकर्ताओं को भी बच्चों की शिक्षा में शामिल किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे सीखने का स्तर और बेहतर हो सके।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (ICDS) बहराइच, निहारिका विश्वकर्मा ने कहा कि बच्चे का सीखने का वातावरण उसके आत्मविश्वास और विकास को सीधे प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का यह बदलाव इस बात का उदाहरण है कि जब सरकारी तंत्र और सहयोगी संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो बड़े सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।

उन्होंने बताया कि बच्चों के अनुकूल वातावरण न केवल उन्हें केंद्र तक आकर्षित करता है, बल्कि उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और समग्र विकास को भी बढ़ाता है। खेल-आधारित शिक्षण सामग्री बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हुजूरपुर ब्लॉक के सीडीपीओ विमल सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करना प्रारंभिक शिक्षा सुधार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि यह पहल ICDS विभाग, सेसमी वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट और मैरिको लिमिटेड के सहयोग से संभव हो सकी है।

उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के जरिए केंद्रों को बेहतर बुनियादी ढांचा, स्वच्छता और आधुनिक शिक्षण सामग्री से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।

मैरिको लिमिटेड के चीफ लीगल ऑफिसर और CSR समिति के सचिव अमित भसीन ने कहा कि किसी भी व्यवसाय का वास्तविक मूल्य उसके सामाजिक योगदान में होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केंद्र में रखते हुए यह पहल बच्चों के लिए बेहतर भविष्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, सेसमी वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट की मैनेजिंग डायरेक्टर सोनाली खान ने कहा कि ‘Learn. Play. Grow.’ पहल के माध्यम से सरकार के साथ मिलकर प्रारंभिक शिक्षा के वातावरण और गुणवत्ता दोनों को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास बच्चों को आगे की शिक्षा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौजूदा सरकारी व्यवस्था के भीतर इस तरह के सुधारों से यह पहल एक ऐसा मॉडल बनकर उभर रही है, जिसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। सुरक्षित, आकर्षक और संसाधनों से युक्त आंगनवाड़ी केंद्र न केवल वर्तमान में बच्चों के सीखने को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उनके भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।

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