गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में “प्रोबायोटिक हस्तक्षेपों के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध का मुकाबला” विषय पर दो-दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी ने प्रोबायोटिक एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के सहयोग से “प्रोबायोटिक हस्तक्षेपों के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध का मुकाबला” विषय पर दो-दिवसीय व्यावहारिक कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के संदर्भ में प्रतिभागियों को वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद के प्रो. भाबIतोष दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने “बहु-दवा प्रतिरोधी रोगजनकों के विरुद्ध स्वदेशी जनन पथ माइक्रोबियल कंसोर्टिया की बायोथेराप्यूटिक क्षमता” विषय पर व्याख्यान देते हुए आधारित प्रोबायोटिक तकनीक की उपयोगिता और इसके व्यावसायिक संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका तथा एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध को कम करने में उनके महत्व को रेखांकित किया। स्कूल ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी की डीन, प्रो. धनलक्ष्मी ने स्वागत भाषण में मानव स्वास्थ्य में माइक्रोबायोम की भूमिका और विभिन्न रोगों के प्रबंधन में प्रोबायोटिक्स की प्रभावशीलता पर जोर दिया।
डीन एकेडमिक्स, प्रो. राजीव वार्ष्णेय ने विशेष रूप से प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्यरत व्यक्तियों, जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैनिकों, के लिए प्रोबायोटिक्स की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. बरखा सिंघल (आयोजन सचिव) ने कार्यशाला के उद्देश्यों और संरचना की जानकारी दी, जबकि इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. उपमा पाल (संयोजक) के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा पुरिया, संकाय सदस्यों एवं कुल 31 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही। दो दिनों के दौरान, प्रतिभागियों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के डॉ. विक्रम सैनी द्वारा “मेज़बान प्रतिरक्षा प्रणाली की पोषणात्मक पुनर्संरचना के माध्यम से एंटीबायोटिक उपयोग” विषय पर तथा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के डॉ. शक्ति साही द्वारा “बहु-दवा प्रतिरोधी जीनों की पहचान हेतु इन-सिलिको हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण” पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्राप्त हुए।
इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को प्रोबायोटिक मेटाबोलाइट्स द्वारा एंटीबायोटिक संवेदनशीलता में परिवर्तन, बायोफिल्म विघटन रणनीतियों तथा प्रतिरोध तंत्रों के आणविक एवं कम्प्यूटेशनल विश्लेषण जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए एक समृद्ध एवं ज्ञानवर्धक अनुभव सिद्ध हुई, जिसने उन्हें आधुनिक अनुसंधान तकनीकों एवं एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के समाधान में प्रोबायोटिक्स की भूमिका के प्रति गहन समझ प्रदान की। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया और सराहना के साथ हुआ।
