गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ‘हिस्ट्री मैटर्स लेक्चर सीरीज’ के तहत क्रिकेट के इतिहास पर विशेष व्याख्यान

ग्रेटर नोएडा, 2 अप्रैल 2026। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत इतिहास एवं सभ्यता विभाग द्वारा ‘हिस्ट्री मैटर्स लेक्चर सीरीज’ के तहत “प्री-मॉडर्न टू मॉडर्न: अ हिस्टोरिकल गेज़ थ्रू क्रिकेट” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में इतिहास और खेल के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा की गई।

कार्यक्रम कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. माधव गोविंद के संरक्षण तथा विभागाध्यक्ष डॉ. रितिका जोशी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. माधव गोविंद ने कहा कि क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक सशक्त माध्यम है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्रों की ऐतिहासिक समझ को विस्तृत करते हैं और उन्हें विषय के प्रति आकर्षित करते हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. शंकर कुमार ने अपने व्याख्यान में क्रिकेट के ऐतिहासिक विकास को पूर्व-आधुनिक काल से आधुनिक युग तक विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि क्रिकेट ने सामूहिक पहचान के निर्माण और राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होंने इस खेल को “जेंटलमैन गेम” के रूप में स्थापित करने वाले मूल्यों—अनुशासन, निष्पक्षता और खेल भावना—पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. कुमार ने क्रिकेट के सामाजिक-राजनीतिक पहलुओं का विश्लेषण करते हुए बताया कि औपनिवेशिक काल में क्रिकेट क्लब अक्सर धार्मिक आधार पर संगठित होते थे, जिससे ब्रिटिश शासन की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को बल मिलता था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महात्मा गांधी ने ऐसे संस्थानों को व्यापक राष्ट्रवादी आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।

समापन अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. रितिका जोशी ने ‘हिस्ट्री मैटर्स लेक्चर सीरीज’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह श्रृंखला इतिहास को पाठ्यक्रम की सीमाओं से बाहर निकालकर समकालीन विमर्श और शोध-आधारित संवाद से जोड़ने का कार्य करती है।

कार्यक्रम का संचालन पीएचडी शोधार्थी आयुष द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डॉ. उपेंद्र, डॉ. प्रियंका, डॉ. अनुराधा, डॉ. पवन सहित विभाग के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अंत में डॉ. अंजू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

व्याख्यान में छात्रों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह आयोजन व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक सत्र साबित हुआ।

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