नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पेपर से प्रोजेक्ट तक: 8 वर्षों में साकार हुआ सपना

सीएम योगी के विजन व नियमित समीक्षा से निर्धारित समय में तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए)

2017 में क्लीयरेंस से 2026 के उद्घाटन तक त्वरित फैसले, कुशल नेतृत्व और समयबद्ध क्रियान्वयन की मिसाल बना एनआईए

एविएशन इंडस्ट्री के फलक पर चमकने को तैयार यूपी का ‘जेवर’, एयरपोर्ट से आगे का विकास मॉडल भी तैयार

जेवर, 28 मार्च। आठ वर्षों के सतत श्रम, समन्वय, सुपरविजन व समीक्षा से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) हकीकत बना है। मार्च 2026 में एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने और अब पीएम मोदी द्वारा फेज-1 के लोकार्पण के बाद यह एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। यह सब कुछ संभव हुआ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प की वजह से, जिनके विजन, कार्यकुशलता व नियमित समीक्षा के चलते यह मेगा प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ा।

2017: एक सपने की शुरुआत
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई, जब जुलाई में साइट क्लीयरेंस और अक्टूबर में गृह मंत्रालय से एनओसी प्राप्त हुई। यही वह समय था, जब जेवर को एक वैश्विक एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की नींव रखी गई। इसके बाद वर्ष 2018 में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनआईएएल) का गठन हुआ और परियोजना को संस्थागत रूप मिला। 2020 में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को कंसेशनायर के रूप में चुना गया और कंसेशन एग्रीमेंट साइन किया गया।

2021: फाइनेंशियल क्लोजर से निर्माण का रास्ता साफ
अगस्त 2021 में फाइनेंशियल क्लोजर और मास्टर प्लान की मंजूरी के बाद अक्टूबर 2021 में ‘अपॉइंटेड डेट (तिथिवार कार्ययोजना)’ घोषित हुई, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट का मार्ग प्रशस्त हो गया। मार्च 2022 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और टाटा प्रोजेक्ट्स को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोकरमेंट एंड कन्सट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त किया गया। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच सभी अहम टास्क समयबद्ध तरीके से पूरे किए गए, जो परियोजना प्रबंधन की दक्षता को दर्शाता है। अक्टूबर 2025 में कैलिब्रेशन फ्लाइट सफल रही और मार्च 2026 में एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया। इसी के साथ एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार हो गया।

हर कदम पर सक्रिय रहे सीएम योगी
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता भूमि अधिग्रहण से लेकर इसके लोकार्पण तक हर कदम पर दिखाई दी। चाहे निर्माण से जुड़े मामले हों, विभिन्न प्रकार की एनओसी या विभागों के बीच समन्वय, सीएम योगी नियमित निर्देशन व समीक्षा से इसे अमली जामा पहनाते रहे। उन्होंने इस परियोजना को केवल एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति बनाई।

इसका नतीजा यह निकला कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक सेक्टर विकास की नई जमीन तैयार कर रहे हैं। यह एयरपोर्ट न सिर्फ रोजगार के लाखों अवसर सृजित करेगा, बल्कि निवेश, औद्योगिकीकरण, निर्यात, लॉजिस्टिक्स व पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का यह परिणाम उत्तर प्रदेश को वैश्विक कनेक्टिविटी और आर्थिक शक्ति के नए युग में प्रवेश कराता है। आठ वर्षों का यह सफर अब नई उड़ान की शुरुआत बन चुका है।

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